आईजीआरएस व मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा में जिलाधिकारी की बड़ी कार्रवाई, शिकायतकर्ता से फीडबैक लिए बिना संपर्क किए बिना निस्तारण करने वाले अधिकारियों का वेतन रोका एवं स्पष्टीकरण तलब किए जाने के निर्देश दिए गए

 

जिलाधिकारी ने रैंडम आधार पर स्वयं एक-एक शिकायतकर्ता से की बात, बोले शिकायतकर्ता की संतुष्टि ही निस्तारण की वास्तविक कसौटी

 जालौन। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने विकास प्राधिकरण सभागार में आईजीआरएस एवं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की विभागवार समीक्षा करते हुए शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की वास्तविक स्थिति परखी। समीक्षा के दौरान उन्होंने स्वयं एक-एक शिकायतकर्ता से दूरभाष पर वार्ता कर फीडबैक प्राप्त किया। कई मामलों में शिकायतकर्ताओं ने असंतोष व्यक्त किया, जबकि अनेक प्रकरण ऐसे पाए गए जिनमें संबंधित अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना ही प्रकरणों को निस्तारण कर दिया था। समीक्षा में आईजीआरएस के अंतर्गत कुल 436 प्रकरणों का परीक्षण किया गया, जिनमें 243 शिकायतकर्ताओं ने संतुष्टि व्यक्त की, जबकि 193 शिकायतकर्ताओं ने असंतोष जताया। समीक्षा में 69 प्रकरण निस्तारित पाए गए तथा 106 मामलों में शिकायतकर्ताओं से फीडबैक ही प्राप्त नहीं किया गया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के अंतर्गत 935 प्रकरणों की समीक्षा की गई, जिनमें 444 शिकायतकर्ता संतुष्ट, जबकि 491 शिकायतकर्ता असंतुष्ट पाए गए। साथ ही 44 प्रकरण स्पेशल क्लोज तथा 306 मामलों में शिकायतकर्ताओं से फीडबैक प्राप्त नहीं किया गया।इस गंभीर लापरवाही पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिशासी अभियंता विद्युत, उप जिलाधिकारी जालौन, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद उरई, जिला समाज कल्याण अधिकारी, उप निदेशक कृषि, तहसीलदार उरई, तहसीलदार कालपी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद जालौन, तहसीलदार जालौन, तहसीलदार कोंच, अधिशासी अभियंता उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), जिला पंचायत राज अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी (पंचायतीराज) डकोर, कदौरा, जालौन एवं महेवा तथा जिला पूर्ति अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोकने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायत का निस्तारण केवल पोर्टल पर दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि वह शिकायतकर्ता से स्वयं संपर्क कर फीडबैक प्राप्त करे। यदि शिकायतकर्ता असंतुष्ट है तो उसका समाधान किया जाए, न कि बिना संवाद स्थापित किए प्रकरण को निस्तारण ना कर दिया जाए। समीक्षा के दौरान सर्वाधिक असंतोषजनक स्थिति विद्युत विभाग, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), जिला पंचायत राज विभाग, समाज कल्याण विभाग, कृषि विभाग तथा नगर निकायों की पाई गई, जबकि कई तहसीलों एवं विकास खंडों में भी शिकायतकर्ताओं से अपेक्षित फीडबैक नहीं लिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग अपने समस्त लंबित एवं असंतुष्ट प्रकरणों की व्यक्तिगत समीक्षा करते हुए शिकायतकर्ताओं से संपर्क स्थापित करे और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता जनसंतुष्टि आधारित शिकायत निस्तारण है। भविष्य में बिना शिकायतकर्ता की संतुष्टि सुनिश्चित किए किसी भी शिकायत को बिना संपर्क किए निस्तारित करने अथवा त्रुटिपूर्ण निस्तारित करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध वेतन रोकने सहित कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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