जिसके संबंध में शिकायतकर्ता ने यूपी जिला अधिकारी को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया
कुठौंद जालौन। जनपद जालौन के विकासखंड कुठौंद के अंतर्गत ग्राम पंचायत नाहिली में तालाब की जगह को लेकर कुछ दबंगों द्वारा कब्जा किए जाने के संबंध में रामकुमार दीक्षित पुत्र शिव कुमार दीक्षित के द्वारा कई प्रार्थना पत्र दिए गए इसके उपरांत कल दिनांक 24 जून 2026 को लेखपाल आर्यन त्रिपाठी ने शिकायतकर्ता की गैर मौजूदगी में गाटा संख्या 311 तालाब पर अवैध निर्माण की पैमाइश कर डाली। जब शिकायतकर्ता ने लेखपाल से कहा यह पैमाइश मेरे सामने मेरी मौजूदगी में होनी थी ।वह बगैर मेरी मौजूदगी के तुमने कैसे पैमाइश कर दी मुझे दोबारा पैमाइश करके दिखाओ। इसी के उपरांत लेखपाल भड़क गये अपने आप को सहन शीलता न रखते हुए शिकायतकर्ता के साथ अभ्रद्र भाषा का प्रयोग किया गया।और कुठौंद स्थित थाने के सामने शिकायतकर्ता बुक स्टोर की दुकान किए हुए हैं। जिसको दुकान हटाने की धमकी भी दे डाली। इस तरह की लेखपाल द्वारा भाषा शैली को सुनकर शिकायतकर्ता ऐसा प्रतीत हुआ है कि लेखपाल आर्यन त्रिपाठी अतिक्रमणकारियों से मिले हुए हैं। इस तरह की भाषा शैली से ऐसा प्रतीत हो रहा है । लेखपाल की सोची समझी मानसिकता को परखने के बाद शिकायतकर्ता को ऐसा आभास हो रहा है कि लेखपाल भ्रष्टाचारी में लुप्त हो चुके हैं। इसीलिए लेखपाल द्वारा दोबारा पैमाइश करने की हीला हवाली की जा रही हैं। लेखपाल का कहना है कि अगर आपको तालाब के जगह की नाप दोबारा तथा सही करानी है तो आप मुझे रिश्वत दो तभी मैं आपकी सही नाप करूंगा। नहीं तो मेरे द्बारा तालाब की नाप हो चुकी है। सिर्फ आख्या भेजनी शेष है।अब दोबारा पैमाइश कराने के लिए बगैर रिश्वत दिए पैमाइश नहीं करा पाओगे। अब तुम ऐसे ही चक्कर लगाते रहोगे।अब यह हमारा तुमसे बादा है । तुम मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाओगे। तुमको मेरे खिलाफ जिससे भी शिकायत करनी हो उसको करने के लिए तुमको मेरी तरफ से पूरी तरह छूट है। मुझे किसी भी प्रकार का कोई भय नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना यदि इस प्रकार के राजस्व कर्मचारी विभाग में रहेंगे तब तक किसी भी शिकायतकर्ता को न्याय कैसे मिलेगा। इसलिए उप जिला अधिकारी जालौन से शिकायतकर्ता की मांग है कि इस प्रकरण में तत्काल प्रभाव से संज्ञान लिया जाए। शिकायतकर्ता की गैर मौजूदगी में पैमाईस की आख्या लेखपाल द्वारा श्रीमान जी आपके समक्ष मनगढ़ंत तरीके से बनाकर प्रस्तुत कर दी गई है। जिस आख्या को शिकायतकर्ता कतई स्वीकार करने को तैयार नहीं है। इसलिए पुनः तालाब की जगह की पैमाइश कराई जाए।अब इनके अलावा कोई दूसरा लेखपाल भेजकर नाप कराई जाए।जिससे दूध का दूध पानी का पानी हो सके।तभी लेखपाल द्बारा की गई करनी और कथनी का पर्दाफाश हो सकेगा।













