कालपी जालौन – कालपी वन क्षेत्र अंतर्गत जंगलों में इन दिनों बेशकीमती पेड़ों की कटान लगातार जारी है। छायादार एवं फलदार वृक्षों पर बेरहमी से आरी चल रही है, जबकि जिम्मेदार विभागीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं। जंगलों की हरियाली उजड़ने से पर्यावरण प्रेमियों एवं ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि एक ओर शासन हरित क्रांति एवं वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र में खुलेआम पेड़ों की कटान कर हरित क्रांति का मजाक उड़ाया जा रहा है।
कालपी वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जंगलों एवं ग्रामीण इलाकों में इन दिनों अवैध रूप से पेड़ों की कटाई जोरों पर चल रही है। सूत्रों के अनुसार लकड़ी माफिया रात के अंधेरे में जंगलों में पहुंचकर हरे-भरे पेड़ों को काट रहे हैं। कटान में नीम, शीशम, आम, जामुन, महुआ एवं अन्य छायादार तथा फलदार वृक्ष शामिल हैं। इन पेड़ों की लकड़ी को ट्रैक्टरों एवं छोटे वाहनों के माध्यम से आसानी से बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में लगातार हो रही कटान से पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा है। गर्मी के मौसम में जहां लोगों को छाया देने वाले पेड़ कम हो रहे हैं, वहीं पक्षियों एवं वन्य जीवों का आश्रय भी समाप्त होता जा रहा है। फलदार वृक्षों की कटाई से ग्रामीणों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई गांवों के लोगों ने बताया कि पहले जंगलों में हरियाली दिखाई देती थी, लेकिन अब वहां कटे हुए पेड़ों के ठूंठ नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही के चलते लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटान पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में जंगल पूरी तरह उजड़ सकते हैं।
पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाता है, लेकिन दूसरी ओर पुराने एवं विशाल पेड़ों की कटाई होने से अभियान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। पेड़ केवल पर्यावरण को शुद्ध करने का कार्य नहीं करते, बल्कि वर्षा, जल संरक्षण एवं तापमान नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं वन विभाग से जंगलों में नियमित गश्त बढ़ाने, अवैध कटान करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा कटे हुए पेड़ों के स्थान पर नए पौधे लगाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो पर्यावरण को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हरित क्रांति एवं पर्यावरण संरक्षण की बात करने वाले विभागों के लिए यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। जंगलों में हो रही अंधाधुंध कटाई यह साबित कर रही है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो आने वाली पीढ़ियों को हरियाली केवल तस्वीरों में ही देखने को मिलेगी।
आर. एन. शुक्ला पत्रकार













