न्यायपालिका ने पर्यावरण के पक्ष में सुनाया ‘ग्रीन ऑर्डर’
कानपुर देहात – जहां फैसले सुनाए जाते हैं, बृहस्पतिवार को वहां से प्रकृति को बचाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर देहात के पदेन अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश रविन्द्र सिंह, एवं जनपद के समस्त न्यायिक अधिकारियों ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को सिर्फ रस्म नहीं, मिसाल बना दिया।
कोर्ट परिसर में कुदाल की आवाज हथौड़ी से ज्यादा गूंजी — क्योंकि इस बार फैसला फाइलों पर नहीं, धरती के सीने पर लिखा गया।
जिला जज की दो टूक कहां है: कि “पौधा लगाना शौक नहीं, आने वाली पीढ़ी का हक है”
जनपद न्यायाधीश रविन्द्र सिंह ने कुदाल उठाकर खुद पौधा रोपा और एलान किया — “वृक्ष जीवन हैं। पौधरोपण के साथ संरक्षण भी हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य समझो। वरना तुम्हारी आने वाली पीढ़ी तुम्हारे खिलाफ पर्यावरण का मुकदमा दायर करेगी।”
न्याय की कुर्सी पर बैठे शख्स का जमीन से जुड़ा होना ही सबसे बड़ा संदेश था। उन्होंने साफ किया कि कोर्ट का काम सिर्फ तारीख देना नहीं, समाज को दिशा देना भी है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नूपुर श्रीवास्तव: कागज से जमीन तक लड़ी ‘ग्रीन जंग’
इस पूरे अभियान की ‘धुरी’ बनीं सचिव नूपुर श्रीवास्तव। UPSLSA का निर्देश आते ही उन्होंने 48 घंटे में पूरा खाका खींच दिया — पौधों की अरेंजमेंट, न्यायिक अधिकारियों की भागीदारी, बार का सहयोग।
उन्होंने खुद पौधा लगाकर साबित कर दिया कि ‘कानून की किताब से बड़ा कोई पेड़ नहीं, और पेड़ लगाने से बड़ा कोई कानून नहीं’। उनकी सक्रियता ने बता दिया कि DLSA सिर्फ मुफ्त कानूनी मदद नहीं देता, मुफ्त ऑक्सीजन की भी गारंटी लेता है।
जब जज-वकील एक साथ बोले: “हरियाली हमारी जमानत है”
जिला जज व सचिव के साथ प्रमुख न्यायाधीश परिवार न्यायालय कल्पना, अपर जिला जज रजत सिन्हा, प्रभानाथ त्रिपाठी, शरद त्रिपाठी, पीयूष तिवारी, सुरेन्द्र सिंह, हिमांशु सिंह, आनन्द प्रिय गौतम ने पौधे रोपे।
बार अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने कहा — “ये मातृत्व और प्रकृति दोनों का सम्मान है। एक पेड़ = एक माँ की सांस।” एकीकृत बार अध्यक्ष राधेश्याम कटियार व माती मुख्यालय बार अध्यक्ष शैलेन्द्र तिवारी ने भी हरियाली का संकल्प लिया।
जनपद में गूंज: “जज साहब ने लगा दिया पर्यावरण पर स्टे”
न्यायिक अधिकारी अंकित कुमार, विहान, अंकुर सोलंकी, प्रिंस तोमर, हर्षित अग्रवाल, प्रिंस, रवीना और अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह सेंगर, सुभाष चन्द्र यादव, जयगोपाल, प्रमोद सिंह, प्रदीप सिंह गौर, दीपक पाण्डेय, अरविन्द सिंह कुशवाहा की मौजूदगी ने कार्यक्रम को आंदोलन बना दिया।
> कोर्ट परिसर के बाहर चाय की दुकान पर चर्चा: “जज साहब ने आज पर्यावरण को काटने वालों की जमानत खारिज कर दी। अब जो पेड़ काटेगा, उसकी फाइल सीधे जज साहब देखेंगे।”













