टिकट घोषित न होने से कयासों का दौर जारी
दो पूर्व विधायक एक बार फिर आ सकते हैं आमने-सामने
रसूलाबाद कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सरकार में देखने को मिलने लगी है चर्चाएं तो 2027 में विधानसभा चुनाव के होने की है लेकिन एक चर्चा यह भी है कि नवंबर दिसंबर में भी विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं जिसको लेकर सियासी गलियारों में अब हलचल और तेज होने लगी है।
बात अगर कानपुर देहात की रसूलाबाद विधानसभा की हो तो यहां मुकाबला बेहद रोचक हो जाता है। 2012 से अस्तित्व में आई रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में सपा केवल एक बार शिवकुमार बेरिया के रूप में जीत पाई थी जबकि दो बार भारतीय जनता पार्टी का कमल खिला। टिकट बदलाव का फार्मूला जहां सपा के लिए फेल साबित हुआ तो वहीं भारतीय जनता पार्टी का हर बार टिकट बदलने का फार्मूला हिट साबित हुआ। चुनाव करीब है ऐसे में दोनों ही दलों के दावेदारों ने भागम भाग तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी से जहां करीब डेढ़ दर्जन प्रत्याशी टिकट के लिए प्रत्याशिता कर रहे हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी से पुराने व अनुभवी चेहरे के साथ करीब तीन नाम खूब चर्चा में है। जानकारों की मानें तो इस बार रसूलाबाद का रण पूर्व विधायक बनाम पूर्व विधायक भी हो सकता है। यदि ऐसा रहा तो एक बार फिर दो दमदार नेता एक बार फिर आमने-सामने हो सकते हैं और मुकाबला बेहद रोचक होगा। समाजवादी पार्टी में सपा की आंदोलन के समय से जुड़े कई बार के विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवकुमार बेरिया रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र से मजबूत दावेदारी कर रहे हैं। 2012 में उन्हें ही विधानसभा क्षेत्र की जनता ने जिताया था इसके बाद उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी और क्षेत्र से अमिट लगाव रखा। सबसे बड़ी बात यह है कि शिवकुमार बेरिया जिस जाति से आते हैं उस जाति का 1 हजार वोट भी इस विधानसभा क्षेत्र में नहीं है। बावजूद इसके उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की थी और उनकी मांग क्षेत्र की जनता हमेशा से करती आई है। चर्चाएं हैं कि शिवकुमार बेरिया को यदि समाजवादी पार्टी टिकट देती है तो लोग दलीय बंधन तोड़कर हर जाति, समुदाय के लोग उनकी मदद करेंगे। अगर बात इतिहास की करें तो वर्ष 2007 में जब रसूलाबाद का आधा हिस्सा बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र में लगता था तब पूर्व विधायक कमलेश चंद्र दिवाकर ने शिवकुमार बेरिया को चुनाव हराया था। यह भी अपने आप मे एक बड़ी बात थी। अब भारतीय जनता पार्टी से पूर्व विधायक कमलेश चंद्र दिवाकर भी मजबूती से दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि दोनों ही दावेदारों का अभी टिकट फाइनल नहीं है लेकिन क्षेत्र में इनके ही नामों की चर्चा खूब हो रही है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो एक बार फिर पुराने लड़ाकू मैदान में होंगे। 2007 के विधानसभा चुनाव में कमलेश चंद्र दिवाकर को 52729 तो शिवकुमार बेरिया को 48770 वोट मिले थे इस प्रकार से करीब महज 3959 वोटो से कमलेश चंद्र दिवाकर ने शिवकुमार बेरिया को जोरदार पटखनी दी थी। अब क्षेत्र में चर्चाएं जोरों से हैं कि यदि शिवकुमार बेरिया को समाजवादी पार्टी टिकट देती है तो कमलेश चंद्र दिवाकर ही उन्हें हरा पाएंगे। हालांकि इनके अलावा दोनों ही दलों में कई और चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं लेकिन टिकट फाइनल होने के बाद ही पता चलेगा कि रसूलाबाद विधानसभा का असली सम्राट कौन होगा। फिलहाल राजनीतिक चहलकदमी तेज होती जा रही है। कोई भी दावेदार कोई कोर कसर छोड़ना नहीं चाहता। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक नेताओं की गाड़ियां फर्राटा भर रहीं हैं।













