स्वयं सहायता समूहों से बदलेगी ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर डीएम ने मिशन शक्ति के तहत आजीविका संवर्धन, बैंक लिंकेज और ‘लखपति दीदी’ अभियान को तेज करने के दिए निर्देश

 

 जालौन। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार उरई में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत जिला क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक कर सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
बैठक में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वयं सहायता समूहों का विस्तार करने, बैंक लिंकेज बढ़ाने तथा “लखपति दीदी योजना” के लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि पात्र एवं अंत्योदय राशन कार्ड धारक परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर समूहों से जोड़ा जाए ताकि अधिक से अधिक महिलाएं स्वरोजगार एवं आय सृजन गतिविधियों से जुड़ सकें। जनपद में अब तक 9413 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है तथा 1,37,701 परिवारों का समूहों से संतृप्तिकरण किया गया है। वहीं 986 ग्राम संगठन एवं 36 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने समूहों को रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि एवं बैंक लिंकेज से शत-प्रतिशत आच्छादित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने परिवार संतृप्तिकरण में कम प्रगति वाले विकास खंड माधौगढ़, नदीगांव, रामपुरा एवं जालौन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एक सप्ताह के भीतर प्रगति में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने अग्रणी जिला प्रबंधक एवं संबंधित अधिकारियों को बैंक समन्वय स्थापित कर समूहों को ऋण उपलब्ध कराने हेतु विशेष अभियान चलाने को कहा।लखपति दीदी योजना की भी विस्तार से समीक्षा की गई।आगामी वर्षों में जनपद की 41,526 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 472 लखपति सीआरपी चयनित की जा चुकी हैं तथा 80 सीआरपी को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि महिलाओं को कृषि, डेयरी, सिलाई, फूड प्रोसेसिंग, पेपर उत्पाद, प्रेरणा कैंटीन, पीडीएस दुकान, मूंगफली उत्पादन एवं गैर कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जाए।जनपद में स्वयं सहायता समूहों द्वारा विभिन्न आजीविका गतिविधियों का सफल संचालन किया जा रहा है, जिनमें सर्वाधिक 6143 महिलाएं गैर कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त एसवीईपी, पीडीएस दुकान, ड्राई फूड वितरण, प्रेरणा कैंटीन एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से भी महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि विकास खंड, तहसील, जिला अस्पताल एवं राजकीय मेडिकल कॉलेज में समूहों द्वारा संचालित प्रेरणा कैंटीन स्थापित कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, डीडीओ प्रशांत पाण्डेय, डीसी मनरेगा रामेन्द्र सिंह, सहित समिति के समस्त सदस्य एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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