मकर संक्रांति मेला कालपी की ऐतिहासिक पहचान है

 

कालपी (जालौन)  ऐतिहासिक धार्मिक परम्पराओं से न केवल सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है बल्कि समाज में एकता भाईचारा और सामाजिक बन्धन भी बढ़ते हैं। यह परंपराएं साझा विश्वासों और साझा उद्देश्यों के माध्यम से लोगों को आपस में जोड़ती हैं ।ऐसी ही एक परंपरा जनपद जालौन के धार्मिक नगर कालपी में भी दशकों से चली आ रही है जिसका धार्मिक और सामाजिक महत्व है जिसे मकर संक्रांति मेला एवं प्रदर्शनी कहा जाता है।
प्रति वर्ष 14फरवरी मकर संक्रांति से एक माह तक चलने वाले हिन्दू मुश्लिम एकता का प्रतीक कहे जाने वाला यह मेला आखिरी सप्ताह में प्रवेश कर चुका है । 15फरवरी को सम्पन्न होने वाला कालपी मेला नगर तथा क्षेत्र और नजदीकी जनपद कानपुर देहात क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है। और एक माह मे दर्शकों की संख्या रिकार्ड कायम करती है। जहां एक ही स्थान पर बच्चों युवाओं का भरपूर मनोरंजन होता है वही महिलाओ को घर ग्रहस्ती सहित तमाम सामान उचित दर पर खरीदने का अवसर मिल जाता है। साथ ही सैकड़ो गरीब दुकानदारों रेहणी वालों को भी व्यवसाय मिलता है। कुल मिलाकर वर्ष में नगर की आम जनता को काफी खुशी मिलती है और मेले का भरपूर आनंद उठाते हैं।
साथियों ये परम्परायें आने वाली पीढ़ियों को संस्क्रति मूल्य और पहचान सौंपने का जरिया है। व्यक्तियों के बीच मतभेदों को मिटाकर उन्हें एक सूत्र में पिरोती हैं।
ऐसे आयोजनों मे जाने से व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। संक्षेप मे कहें तो ऐतिहासिक धार्मिक परम्पराऐं एक समाज की ऐतिहासिक विरासत और उसकी सामाजिक संरचना को आपस में जोड़कर रखती हैं।

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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