कानपुर देहात। करीब 17 वर्ष पुराने दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के मामले में कानपुर देहात न्यायालय ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। एडीजे-03/डकैती कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त धीरेन्द्र सिंह को 7 वर्ष के कारावास और ₹27,000 के अर्थदंड से दंडित किया, जबकि गुड्डी देवी और रेनू देवी को 3-3 वर्ष के कारावास तथा ₹7,000-7,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई।
मामला 25 नवंबर 2009 का है। आरोप था कि अभियुक्त धीरेन्द्र सिंह पुत्र स्व. इन्द्रपाल सिंह निवासी ग्राम जाफराबाद, थाना गजनेर तथा गुड्डी देवी पत्नी राम सिंह निवासी ग्राम नुनारी और रेनू देवी पत्नी देवेन्द्र सिंह निवासी ग्राम अमौली ठकुरान, थाना डेरापुर ने दहेज की मांग को लेकर वादी की पुत्री को प्रताड़ित किया। प्रताड़ना से परेशान होकर वादी की पुत्री ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
घटना के संबंध में थाना गजनेर पर मु0अ0सं0 361/09, धारा 498ए/306 भादवि के तहत तीनों अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचक ने मामले की गुणवत्तापूर्ण विवेचना करते हुए साक्ष्य संकलित किए और 28 मार्च 2011 को अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों अभियुक्त दोषी पाए गए। अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे #OperationConviction अभियान के तहत थाना गजनेर पुलिस, कोर्ट पैरोकार, अभियोजन पक्ष और मॉनिटरिंग सेल द्वारा लगातार प्रभावी पैरवी की गई।
न्यायालय का फैसला
एडीजे-03/डकैती कोर्ट, कानपुर देहात ने 20 अगस्त 2026 को दोषसिद्ध अभियुक्त धीरेन्द्र सिंह को 7 वर्ष के कारावास और ₹27,000 के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं अभियुक्ता गुड्डी देवी और रेनू देवी को 3-3 वर्ष के कारावास तथा ₹7,000-7,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अर्थदंड अदा न करने पर धीरेन्द्र सिंह को एक वर्ष तथा गुड्डी देवी और रेनू देवी को 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पुलिस के अनुसार न्यायालय का यह फैसला दहेज जैसे सामाजिक अपराधों पर अंकुश लगाने और अपराधियों में कानून का भय पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।











