कालपी (जालौन)। इस्लामी साल का ये तीसरा महीना है जिसे रबी-उल्-अव्वल के नाम से जाना जाता है, इस महीने का चाँद नज़र आते ही खूब रौनके बढ़ जाती है। इस बार 26 अगस्त बरोज़ बुध को पिछली रिवायात के मुताबिक बड़े ही शानो शौकत के साथ में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जाएगा आप लोगों से गुज़ारिश है कि जुलूस में बड़े ही अदब और अखलाक के साथ में सलातो सलाम , नात पाक पड़ते हुए चलें दारुल उलूम गौसिया मजीदिया के नाज़िमें आला अलहाज हाफिज इरशाद अशरफी ने बताया कि इस्लाम के पैगम्बर आखिरी नबी की आमद(पैदाइश) जब इस दुनिया मैं हुई नही थी तब दुनियादार लोग हराम नाजायज कामों में अपनी जिंदगी गुज़राते थे। और जब अल्लाह ने अपने फ़ज़लो करम से इस दुनिया मे अपने महबूब नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम को पैदा फरमाया तो हर तरफ इंसानियत और अमन का परचम बुलंद होने लगा लोगों के बीच से नाजायज़ व हराम काम दूर हुए और दीन की राह में लोग चलने लगे दारुल उलूम गौसिया मजीदिया के प्रिंसिपल मुफ़्ती तारिक़ अख्तर ने बताया कि जब हमारे आका हुजूर पैगंबर-ए-आजम की इस दुनिया में आमद(जन्म हुआ) तो वह वक्त सुबह सादिक यानी भोर सवेरा था। अल्लाह के हुक़्म से मासूम फरिश्ते महबूबे खुदा की आमद पर दुरूद व सलाम पेश कर रहे थे तो उसी नबी की आमद की खुशी पर आज भी पूरी दुनिया में मुसलमान अपने आका का मिलाद मनाते हैं हर मोहल्ले गलियों और घरों को सजाया जाता है और धूमधाम से जुलूस निकालते हैं तकिया मस्जिद के इमाम अलहाज अब्दुल मुजीब ने बताया कि हम लोग अपने आका के आने की खुशी में खूब सजावट व रोशनी और लंगर करते हैं और जो वक्त उनकी आमद का है भोर सवेरे तो उसी वक्त पर सुबह 3 बजे जुलूसे चिरांगा भी निकलता है जो जुलैहठी की बड़ी मस्जिद से उठता है और फिर वही पर फजर की नमाज के वक्त आकर समाप्त होता है सभी हज़रात से अपील है कि इस चिरांगा के जुलूस में भी शामिल हों और नमाज़ फज्र के बाद लंगर में भी शिरकत करें कारी ज़रीफ़ खान , कारी दिलशाद रज़ा , हाफिज नौशाद ने भी कहा कि इसमें खूब खुशियां मनाना चाहिए।
पत्रकार सतीश द्विवेदी कालपी











