एरवा कटरा (औरैया) विकास खंड एरवा कटरा की ग्राम पंचायत एरवा टीकुर से सरकारी तंत्र की घोर संवेदनहीनता और ठेकेदारी प्रथा की तानाशाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। यहाँ जल निगम के ठेकेदार ने अपनी दबंगई की सारी हदें पार करते हुए, करोड़ों की लागत से बनी मुख्य सड़क को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।
लाखों की आबादी परेशान; 112 और एम्बुलेंस के भी थमे पहिये
मामला एरवा टीकुर से एरवा बरौना को जोड़ने वाले लगभग 10 किलोमीटर लंबे मुख्य मार्ग का है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ वर्ष पूर्व ही इस मार्ग पर जनता की सुविधा के लिए बेहद मजबूत 10 इंच मोटी आरसीसी (RCC) रोड का निर्माण कराया गया था। लेकिन जल निगम के ठेकेदार ने अपनी मनमानी के चलते इस मजबूत रोड को बीचों-बीच से खोदकर मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है।
हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि राहगीरों और दोपहिया वाहनों का निकलना तो दूर, आपातकालीन स्थिति में मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली पुलिस की डायल 112 गाड़ी तक इस मलबे और गड्ढों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
न कोई नोटिस, न रूट डायवर्जन; ग्रामीणों के विरोध को भी ठेकेदार ने किया दरकिनार
नियमों की धज्जियां उड़ाने का आलम यह है कि इतने बड़े मुख्य मार्ग को बंद करने या खोदने से पहले विभाग या ठेकेदार द्वारा न तो कोई सार्वजनिक सूचना जारी की गई, न ही मौके पर कोई चेतावनी या नोटिस बोर्ड चस्पा किया गया। यहाँ तक कि यातायात को सुचारू रखने के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग (रूट डायवर्जन) की व्यवस्था भी नहीं की गई।
जब स्थानीय ग्रामीणों ने इस मनमाने काम को देखा और ठेकेदार को रोकने की कोशिश की, तो ग्रामीणों की जायज आपत्ति को भी दबंगई के बल पर दरकिनार कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मना करने के बावजूद बिना किसी योजना के सड़क को बीच से चीर देना सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और जनता को प्रताड़ित करना है।
जनसंदेश 24 न्यूज़ का सवाल- इस शर्मनाक बर्बादी का जिम्मेदार कौन?
सरकारी बजट से जनता की सहूलियत के लिए बनाई गई बेहतरीन सड़क को इस तरह बेरहमी से उजाड़ देना बेहद शर्मनाक और जांच का विषय है। ठेकेदार की इस मनमानी और जल निगम की इस आंखें मूंद लेने वाली अनदेखी से क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
जनसंदेश 24 न्यूज़ प्रशासन और जिले के उच्चाधिकारियों से यह मांग करता है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। बिना अनुमति और बिना रूट प्लान के सड़क काटने वाले दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, और जनता की सहूलियत के लिए इस मार्ग को युद्धस्तर पर तुरंत दुरुस्त कराया जाए।
रिपोर्ट:- गौरव कुमार पोरवाल













