कालपी (जालौन)। देश के प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार एवं कालपी निवासी श्याम सुंदर श्रीवास्तव ‘कोमल’ की कविता “अमृत वेला का सुख” को भारतीय उपमहाद्वीप के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। उनकी यह रचना नई दिल्ली की नवनीत एजुकेशन लिमिटेड द्वारा तैयार की गई हिंदी पाठ्यपुस्तक “नव गुलिका” कक्षा-2 में प्रथम पाठ के रूप में शामिल की गई है। वर्ष 2027 से भारतीय उपमहाद्वीप के बच्चे इस कविता का अध्ययन करेंगे इस उपलब्धि पर शिक्षाविदों तथा समाजसेवियों ने खुशी जताई है।
खबर के मुताबिक कालपी निवासी श्याम सुंदर श्रीवास्तव ‘कोमल’ मध्य प्रदेश के भिंड जनपद स्थित अशोक हायर सेकेंडरी स्कूल, लहार में हिंदी व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं उनकी कविता को बच्चों की मानसिक क्षमताओं, अभिरुचियों, आयु एवं बौद्धिक दक्षताओं को ध्यान में रखते हुए चयनित किया गया है पाठ्यपुस्तक निर्माण से जुड़े विभागीय अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों, विद्वान निर्णायक मंडल एवं बाल साहित्यकारों के लंबे विचार-विमर्श के बाद रचना को अंतिम रूप दिया गया श्याम सुंदर श्रीवास्तव ‘कोमल’ की अनेक रचनाएं महाराष्ट्र बोर्ड (एससीईआरटी), सीबीएसई एवं आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में भी पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाई जा रही हैं। बाल साहित्य के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय ‘कोमल’ को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
कोमल की रचनाएं एनसीईआरटी नई दिल्ली की बाल पत्रिका ‘फिरकी बच्चों की’, एससीईआरटी बेसिक शिक्षा परिषद लखनऊ की ‘प्रेरणा’, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के प्रकाशन विभाग की ‘बाल भारती’, ‘देवपुत्र’, ‘बाल वाटिका’, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ‘बाल वाणी’, बिहार सरकार के किलकारी बाल भवन की ‘बाल किलकारी’, दिल्ली की ‘रीडर्स क्लब बुलेटिन’ तथा राजस्थान की ‘बच्चों का देश’ सहित देश की अनेक प्रतिष्ठित बाल पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।
पत्रकार सतीश द्विवेदी कालपी












