उरई कृषि विज्ञान केन्द्र रूरामल्लू जालौन में एक दिवसीय माइक्रोइरीगेशन गोष्ठी आयोजन किया गया इसमें लगभग 100 कृषकों को प्रशिक्षित किया गया।
गोष्ठी का शुभारम्भ लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी प्रगतिशील कृषक द्वारा किया गया, उन्होंने प्रतिभागी कृषकों को जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया गया कि अक्सर हमारी मानसिकता पानी की उपलब्धता होने पर अधिकतम पानी का उपयोग सिंचाई हेतु किया जाता है, अधिक जल व कम जल दोनो ही पौधों के विकास में बाधक है, जो पौधों के विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालते है। अतः आपको इस बात का ध्यान देना होगा कि पानी उर्वरक खाद व बीज की मात्रा में एक सन्तुलन की आवश्यकता है, जिसमें आप कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र व उद्यान विभाग के सहयोग से संचालित विभिन्न कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त कर अपनी कृषि को लाभकारी बना सकते है।
कृषि विज्ञान केन्द्र रूरामल्लू के अध्यक्ष डॉ० मो० मुस्तफा द्वारा ऐसी प्रजातियों की खेती पर जोर दिया गया, जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हो, इसका लाभ यह होगा कि रोग प्रतिरोधी प्रजातियों के चयन से अनावश्यक विषैले रसायनों से पौधों पर पड़ने वाले प्रभाव से पौधों को बचाया जा सकेगा साथ ही आम जनमानस को मिलने वाले कृषि उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होने की सम्भावना भी अधिक होगी।
डॉ० मंजुल पाण्डेय द्वारा कृषि फसलों में फसल चक्रपरिवर्तन पर जोर देते हुए प्रतिरोधी प्रजातियों की खेती पर विशेष जोर दिया तथा खेती में आधुनिक पद्धतियों जैसे कलर ट्रैप, लाइट ट्रैप व मल्चिंग का प्रयोग करने पर कृषि लागत को कम करने में सहायक होगी, साथ ही साथ कीड़े मकोड़े व बीमारियों से भी फसलें कम प्रभावित होंगी।
कृषि वैज्ञानिक श्री मारूफ अहमद द्वारा खेती किसानी के साथ साथ पशुओं के पालन पोषण पर विशेष जोर दिया गया साथ ही साथ धन जीवा मृत, जीवा मृत, वर्मी कम्पोस्ट आदि जैविक उत्पादों पर जोर दिया गया।
कृषि वैज्ञानिक राजकुमारी द्वारा लोगों को संतुलित आहार के सेवन पर जोर दिया साथ ही साथ भोजन में मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, कोदो इत्यादि के सेवन से गुलेटिन फी भोजन से होने वाले फायदों का अधिक से अधिक लोंगो में प्रचार करने का आवाहन किया गया।
अन्त में जिला उद्यान अधिकारी परवेज खान द्वारा गोष्ठी में आये हुए प्रतिभागियों को आभार ज्ञापित किया गया।









