समस्त लेखपाल एवं राजस्व निरीक्षक गाटा संख्या पर अवशेष अंश तथा त्रुटियां निर्धारण का अभियान चला कर निर्धारित तिथियां में पूरा करें-अमित शेखर

कालपी जालौन – उप जिलाधिकारी अमित शेखर ने समस्त लेखपालों एवं राजस्व निरीक्षकों निर्देश दिए कि खतौनी के शेष अंश एवं त्रुटियों को अपने अपने संबंधित ग्रामों में जाकर बैठक करें बैठक पर मौजूद किसानों को खतौनी गाटा संख्या से अवगत करा कर सभी कर्मियों को दिनांक 22 जून से 25 जून तक विशेष अभियान चला कर मिशन को पूरा करें।
सोमवार के दिन तहसील कैंपस में मौजूद उप जिलाधिकारी अमित शेखर ने सरकार के द्वारा निर्गत आदेश की प्रति देते हुए अवगत कराया कि क्षेत्रीय लेखपालों द्वारा अंश निर्धारण से बचे हुये अवशेष गाटों में अंश निर्धारण तथा त्रुटिपूर्ण अंश निर्धारण के संशोधन हेतु क्रमिक रुप से 2 दो दिवसों/चरणों में निम्नवत कार्यवाही की जायेगी –
(1) अंश निर्धारण से बचे हुये अवशेष गाटों के सम्बन्ध में कार्यवाही-
प्रथम चरण-
(i) बैठक से पूर्व सर्वप्रथम लेखपाल द्वारा भूलेख वेबसाईट के अंश निर्धारण पोर्टल से सम्बधित राजस्व ग्रामों के ऐसे समस्त खातेदारों/सह खातेदारों के गाटों की सूची तैयार की जायेगी, जिनमें अंश निर्धारण का कार्य अवशेष हैं। तत्पश्चात उक्त सूची को ग्राम की भूमि प्रबन्धक समिति के माध्यम से खातेदारों एवं सह- खातेदारों के मध्य वितरित की जायेगी, ताकि सभी को जानकारी प्राप्त हो सके।
(ii) बैठक हेतु निर्धारित प्रथम कार्यदिवस में लेखपाल द्वारा भूमि प्रबन्धक समिति एवं समस्त खातेदारो / सहखातेदारों साथ राजस्व ग्राम में खुली बैठक आयोजित कर उक्त सूची को पढ़कर सुनाया जायेगा। उसके बाद भूमि प्रबन्धक समिति एवं सम्बन्धित खातेदारों / सह-खातेदारों से विचार-विमर्श करते हुये अवशेष गाटों के प्रारम्भिक तौर पर सादा कागज पर अंश तैयार किये जायेंगे।
(iii) बैठक के अंत में लेखपाल द्वारा सभी उपस्थितों को यह अवगत कराया जायेगा कि अवशेष गाटों का प्रारम्भिक तौर पर तैयार किये गये इस अंश निर्धारण पर अभी सम्बन्धित खातेदारों/सह-खातेदारों की सहमति बाकी है। इसलिये वह पुनः कोई निश्चित कार्य दिवस (लेखपाल द्वारा उनको स्थान, दिनांक व समय से अवगत कराया जायेगा) में उस ग्राम में आयेगा एवं सम्बन्धित खातेदार/सह-खातेदार से हस्ताक्षर / अगूंठा एवं आवश्यक विधिक प्रपत्र (भूमि क्रय सम्बन्धी बैनामा इत्यादि या सक्षम न्यायालय का आदेश ) प्राप्त करेगा।
(iv) बैठक के पश्चात उसी कार्य दिवस में सायं तक लेखपाल द्वारा ऐसे समस्त अंश निर्धारण के अवशेष प्रकरणों, जिनमें खातेदार/सह-खातेदार सहमत है, भूलेख पोर्टल से अंश निर्धारण की प्रक्रिया द्वारा आकार पत्र ख0पु0-2 व ख०पु०3 तैयार किये जायेंगे।
द्वितीय चरण-
(i) द्वितीय चरण में लेखपाल पूर्व में निश्चित की गई तारीख व समय पर उसी राजस्व ग्राम में जाकर भूलेख पोर्टल से पूर्व में तैयार किये गये आकार पत्र ख०पु०-3 को राजस्व निरीक्षक द्वारा आर0सी0 प्रपत्र-8 में जारी किये जाने वाले नोटिस के साथ संलग्न करते हुये सम्बन्धित खातेदार / सह खातेदार को तामील करायेगा एवं सहमति के रुप में हस्ताक्षर/ अगूंठा लगवाकर आवश्यक विधिक प्रपत्र प्राप्त करेगा।
(ii) लेखपाल द्वारा सम्बन्धित खातेदार / सह- खातेदार से सहमति प्राप्त होने के उपरांत प्राप्त समस्त आकार पत्र ख0पु0-3, अपनी आख्या एवं विधिक प्रपत्र को भूलेख पोर्टल पर अपलोड किये जायेंगे एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु राजस्व निरीक्षक को अग्रसारित किये जायेंगे।
(iii) राजस्व निरीक्षक द्वारा, उसकी लॉगिन पर प्रदर्शित ऐसे समस्त प्रकरणों, जिनमें खातेदार / सह-खातेदार की सहमति प्राप्त है, के सम्बन्ध में उसी कार्यदिवस में अंश निर्धारण के आदेश पारित किये जायंगे एवं रजिस्ट्रार कानूनगों द्वारा तसार आर-6 एवं खतौनी में संशोधन किया जायेगा।
(iv) जिन प्रकरणों में खातेदार / सह-खातेदार असहमत है, तो लेखपाल द्वारा विवादित की टिप्पणी के साथ आख्या को भूलेख पोर्टल पर अपलोड कर राजस्व निरीक्षक को अग्रसारित की जायेगी।
राजस्व निरीक्षक द्वारा पक्षकारों के मध्य सुलह समझौते के आधार पर तय न होने वाले ऐसे समस्त प्रकरणों को उपजिलाधिकारी को अग्रसारित किये जायेंगे। उपजिलाधिकारी द्वारा उ0प्र0 राजस्व संहिता, 2006 की धारा 116 के अन्तर्गत आर0सी0सी0एम0एस0 पोर्टल पर वाद दर्ज कर, सम्बन्धित पक्षकारों को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करने के पश्चात प्रारम्भिक आदेश पारित करेगा एवं प्रारम्भिक डिक्री बनायेगा उपजिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश के क्रियान्वयन हेतु रजिस्ट्रार कानूनगों द्वारा तनुसार आर-6 एवं खतौनी में संशोधन किया जायेगा।
(v) जिन प्रकरणों में खातेदार / सह-खातेदार अनुपस्थित (राजस्व ग्राम से बाहर रहने के कारण) है, तो ऐसे प्रकरणों में लेखपाल द्वारा अनुपस्थित खातेदार / सह खातेदार का नाम, उसके गाटा व रकबा की सूची सहित आख्या तैयार कर ग्राम प्रधान से हस्ताक्षर प्राप्त करते हुये आख्या को भूलेख पोर्टल पर अपलोड की जायेगी अग्रेत्तर अनुपस्थित खातेदारों/सह-खातेदारों के राजस्व ग्राम में आने की सूचना प्राप्त होने पर लेखपाल द्वारा सम्पर्क स्थापित कर उनके गाटों में अंश निर्धारण करने हेतु उपरोक्तानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
(2) त्रुटिपूर्ण अंश निर्धारण में संशोधन के सम्बन्ध में कार्यवाही-
प्रथम चरण-
(i) सर्वप्रथम लेखपाल द्वारा राजस्व ग्राम में त्रुटिपूर्ण अंश निर्धारण के सम्बन्ध में बैठक करने से पूर्व भूलेख पोर्टल पर प्रदर्शित ऐसे समस्त गाटों, जिनमें अंश निर्धारण हो चुका है, की खतौनी प्राप्त की जायेगी।
(ii) बैठक हेतु निर्धारित प्रथम कार्य दिवस में लेखपाल द्वारा उस राजस्व ग्राम की खतौनी में दर्ज ऐसे प्रत्येक खातेदार / सह- खातेदार के गाटों के अंश को पढ़कर सुनाया जायेगा, जिनमें पूर्व में ही अंश निर्धारण हो चुका है। तत्पश्चात जिन-जिन खातेदारों/सह खातेदारों के अंश निर्धारण में त्रुटियों के प्रकरण संज्ञान में आयेंगे, ऐसे समस्त प्रकरणों के सम्बन्ध में लेखपाल द्वारा उसी समय प्राथमिक तौर पर सादा कागज पर सही अंश दर्ज कर लिये जायंगे।
(iii) बैठक के अंत में अवशेष अंश निर्धारण के द्वितीय चरण की कार्यवाही हेतु निर्धारित कार्य दिवस में उनको राजस्व ग्राम में आने एवं ख०पु०-3 पर पुनः सहमति प्रदान करने के सम्बन्ध में लेखपाल द्वारा अवगत कराया जायेगा।
(iv) बैठक के पश्चात लेखपाल द्वारा उसी कार्यदिवस में सायं तक त्रुटिपूर्ण अंश निर्धारण के सम्बन्ध में संज्ञान में आये समस्त प्रकरणों के आकार पत्र ख0पु0-3 निकाले जायेगे एवं त्रुटियों का अध्ययन किया जायेगा।
द्वितीय चरण-
(i) द्वितीय चरण में लेखपाल द्वारा अवशेष अंश निर्धारण हेतु पूर्व में निश्चित की गई तारीख व समय पर उसी राजस्व ग्राम में जायेगा। त्रुटिपूर्ण अंश के संबंध में निम्नवत स्थिति उत्पन्न हो सकती है-
(क) ऐसे प्रकरण जिनमें सह-खातेदार आकार पत्र ख0पू0 3 पर पूर्व में दी गयी सहमति से वर्तमान में भी सहमत है, तो लेखपाल पुनः सहमति के रूप में उनसे ख0पू0-3 के पीछे हस्ताक्षर / अंगूठा निशान प्राप्त करेगा। (ख) ऐसे प्रकरण जिनमें, सहखातेदार आकार पत्र ख०पू०-3 पर पूर्व में दी गयी सहमति से वर्तमान में भी सहमत है, किन्तु लेखपाल / राजस्व कर्मियों की लिपकीय त्रुटि के कारण अंश निर्धारण गलत हो गया है, तो लेखपाल सहखातेदार से आवेदन पत्र एवं सहमति के रूप में ख0पू0-3 के पीछे पुनः हस्ताक्षर / अंगूठा निशान प्राप्त करेगा।
(ख) ऐसे प्रकरण जिनमें सहखातेदार आकार पत्र ख0पू0 3 पर पूर्व में दी गयी सहमति से वर्तमान में असहमत है, तो लेखपाल उनसे असहमति के सम्बन्ध में अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ आवेदन पत्र प्राप्त करेगा।
(ii) बैठक के पश्चात् उसी कार्यदिवस में प्राप्त समस्त प्रपत्र ख0पु0-3, आख्या एवं विधिक प्रपत्रों को भूलेख वेबसाईट के “भूलेख खतौनी अंशत्रुटि सुधार” पर अपलोड किया जायेगा एवं अग्रेत्तर कार्यवाही हेतु राजस्व निरीक्षक को अग्रसारित किया जायेगा।
(iii) राजस्व निरीक्षक द्वारा उसकी लॉगिन आई0डी0 में प्रदर्शित हो रही लेखपाल की सभी जांच आख्या का परीक्षणोंपरान्त तहसीलदार की आनलाईन अनुमति हेतु अग्रसारित किया जायेगा।
(iv) तहसीलदार द्वारा उसकी लॉगिन आईडी0 में प्रदर्शित हो रही क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक की सभी आख्याओं का परीक्षण कर अविवादित आवेदनों के सम्बन्ध में आनलाईन अनुमति प्रदान की जायेगी व जिन आवेदन में अंश निर्धारण विवादित है या वह राजस्व निरीक्षक की आख्या से असहमत है, तो अपनी संस्तुति सहित आख्या उप जिलाधिकारी को अग्रसारित की जायेगी।
विवादित आवेदनों के संबंध में उपजिलाधिकारी द्वारा उ०प्र० राजस्व संहिता, 2006 की धारा 116 के अन्तर्गत आर०सी०सी०एम०एस० पोर्टल पर वाद दर्ज कर, उपरलिखित व्यवस्था के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
(v) तहसीलदार की अनुमति प्राप्त होने के पश्चात राजस्व निरीक्षक द्वारा प्रविष्टि के संशोधन का आदेश राजस्व अभिलेखों में अंकन किए जाने हेतु राजस्व निरीक्षक (कार्यालय) को आनलाईन अग्रसारित किया जायेगा तथा तद्नुसार राजस्व निरीक्षक कार्यालय द्वारा इस आदेश का अमलदरामद नामान्तरण बही – आर-6 और खतौनी में अंकन किया जायेगा। 5. यह भी निर्देश दिये जाते है कि किसी राजस्व ग्राम में लेखपाल की बैठक में अभियान के दौरान संज्ञान में आये समस्त प्रकरणों (चाहें वह अंश निर्धारण से बचे हुये अवशेष गाटों में अंश निर्धारण से सम्बन्धित हो अथवा तथा त्रुटिपूर्ण अंश निर्धारण में संशोधन के सम्बन्ध में हो) का प्रत्येक दशा में अभियान के प्रारम्भ की तिथि से अगले 10 कार्य दिवस (4 जुलाई भीतर शत-प्रतिशत निस्तारण कराते हुये यथाविधि खतौनी में अंकन कर लिया जायेगा।
2026 तक) के इसके उपरांत यदि कोई अवशेष अंश निर्धारण ( विवादित प्रकरण या जिनमें खातेदार / सह-खातेदार अनुपस्थित है, को छोडकर) अथवा त्रुटिपूर्ण अंश निर्धारण में संशोधन (विवादित प्रकरणों को छोड़कर) का प्रकरण संज्ञान में आता है, जिनमें लेखपाल द्वारा कार्यवाही नही की गई है, तो सम्बन्धित लेखपाल का उत्तरदायित्व निर्धारण करते हुये आवश्यक अनुशासनिक कार्यवाही की जायेगी।
पत्रकार सतीश द्विवेदी कालपी

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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