कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कुम्हड़ा को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल करने के संबंध में दिए निर्देश
कानपुर देहात के किसानों को बेहतर कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केवीके को दीघ फार्म में स्थापित करने तथा ग्रीष्मकाल में नहरों का नियमित संचालन कराने की भी रखी मांग
कानपुर देहात। चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर के प्रेक्षागृह में मण्डल स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। गोष्ठी में गो-सेवा आयोग के सदस्य श्याम बिहारी गुप्ता, प्रमुख सचिव कृषि, विश्वविद्यालय के कुलपति, मण्डल के वरिष्ठ अधिकारी तथा कृषि वैज्ञानिकों सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
गोष्ठी में मुख्य विकास अधिकारी, कानपुर देहात विधान जायसवाल के नेतृत्व में कृषि, उद्यान, भूमि संरक्षण एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा सभी विकास खंडों से आए लगभग 150 प्रगतिशील किसानों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को रबी फसलों की उन्नत खेती, गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग, बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
गोष्ठी में मुख्य विकास अधिकारी ने कानपुर देहात के किसानों की समस्याओं एवं कृषि विकास से संबंधित महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से शासन के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि जनपद में खरीफ के मौसम में कद्दू एवं कुम्हड़ा (पेठा) की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। प्राकृतिक आपदाओं एवं प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण किसानों को होने वाले संभावित नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के लिए कुम्हड़ा फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत शामिल किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने के लिए विभागीय अनुदान की व्यवस्था किए जाने की मांग भी रखी गई।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा उठाए गए इस महत्वपूर्ण विषय पर मुख्य अतिथि एवं प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने संज्ञान लेते हुए कुम्हड़ा फसल को फसल बीमा योजना में शामिल करने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। इस पहल से जनपद के कुम्हड़ा उत्पादक किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक पहल होने की उम्मीद है।
मुख्य विकास अधिकारी ने कृषि विस्तार सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) को वर्तमान स्थल दिलीप नगर से स्थानांतरित कर विकास खंड मलासा स्थित दीघ फार्म में स्थापित किए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि दीघ फार्म जनपद के भौगोलिक मध्य में स्थित होने के कारण विभिन्न विकास खंडों के किसानों के लिए अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इससे किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, नवीन कृषि तकनीकों के प्रशिक्षण तथा उन्नत खेती से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सुगमता होगी।
मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद में जायद फसलों के बढ़ते रकबे को देखते हुए किसानों की सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने ग्रीष्मकाल में नहरों का नियमित एवं निर्बाध संचालन निर्धारित रोस्टर के अनुसार सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया, जिससे किसानों को समय से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिले।
मण्डल स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी में किसानों की समस्याओं, कृषि सुविधाओं के विस्तार तथा सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने से संबंधित विषयों को प्रमुखता से उठाया गया। कुम्हड़ा फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल करने के संबंध में कृषि मंत्री द्वारा दिए गए निर्देश से इस विषय पर आगे की कार्रवाई की उम्मीद जगी है। गोष्ठी में किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती करने, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।












