बीमित कृषक 72 घंटे के भीतर 14447 पर दर्ज कराएं फसल क्षति की सूचना
कानपुर देहात। विगत दिनों हुई असामयिक वर्षा एवं तेज हवाओं के दृष्टिगत उप कृषि निदेशक, कानपुर देहात हरिशंकर भार्गव द्वारा तहसील डेरापुर क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में फसलों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि क्षेत्र में तिल की फसल को आंशिक रूप से कुछ नुकसान पहुंचा है, जबकि अन्य प्रमुख फसलों में कोई विशेष क्षति परिलक्षित नहीं हुई है। किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राजस्व विभाग के लेखपालों, कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों तथा अधिकृत बीमा कंपनी एचडीएफसी एर्गो की संयुक्त टीमों का गठन कर दिया गया है, जो प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थलीय सत्यापन एवं वास्तविक क्षति का आंकलन करेंगी।
निरीक्षण के उपरांत उप कृषि निदेशक विकास खंड डेरापुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी में सम्मिलित हुए। गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने किसानों एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन बीमित कृषकों की फसलें वर्तमान वर्षा एवं आंधी से प्रभावित हुई हैं, वे घटना के 72 घंटे के भीतर एकीकृत टोल-फ्री नंबर 14447 पर अपनी शिकायत अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। समय से सूचना प्राप्त होने पर सर्वेक्षण की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर क्षतिपूर्ति संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान मौसमीय परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। हालिया वर्षा के कारण खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध है, इसलिए किसान फिलहाल अतिरिक्त सिंचाई न करें। जिन खेतों में पानी जमा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर नालियां बनाकर जल निकासी की व्यवस्था करें, जिससे फसलों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे तथा सड़न की समस्या उत्पन्न न हो।
उप कृषि निदेशक ने किसानों को यह भी सलाह दी कि अधिक नमी के कारण कीट एवं फफूंद जनित रोगों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में किसान अपने खेतों की नियमित निगरानी करें तथा किसी भी प्रकार के रोग या कीट प्रकोप की जानकारी मिलने पर कृषि विभाग के क्षेत्रीय प्राविधिक सहायकों अथवा कृषि विशेषज्ञों से परामर्श प्राप्त कर संस्तुत कीटनाशकों एवं फफूंदनाशकों का ही प्रयोग करें।
गोष्ठी में रबी अभियान की तैयारियों, उन्नत कृषि तकनीकों तथा फसल सुरक्षा संबंधी विभिन्न विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई तथा किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।















