उरई में स्थाई लोक अदालत के संचालन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

उरई। विगत दिवस उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं विरजेन्द्र कुमार सिंह, अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान-उरई के कुशल मार्ग दर्शन में जनपद न्यायालय उरई में स्थाई लोक अदालत के संचालन एवं न्यायिक क्षेत्र के बारे में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन मनाली चन्द्रा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान उरई की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के  मनाली चन्द्रा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन द्वारा उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये बताया गया कि स्थाई लोक अदालत का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत किया गया है। यह एक स्थायी निकाय है, जो सामान्य अदालतों की तरह नियमित रूप से (प्रतिदिन) कार्य करती है और स्थाई लोक अदालत के विषय में विस्तृत जानकारी दी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में  रामबाबू केवट सदस्य स्थायी लोकअदालत जालौन द्वारा उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं को बताया कि स्थाई लोक अदालत भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान का एक अत्यंत प्रभावी और सुलभ माध्यम है। सामान्य न्यायालयों में मुकदमों के बढ़ते बोझ और न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करने के उद्देश्य से इसका गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि स्थाई लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का निपटारा करना है। इसके कार्यक्षेत्र में निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं परिवहन सेवाएं (यात्री या माल परिवहन) ,डाक, टेलीफोन या दूरसंचार सेवाएं बिजली, पानी और स्वच्छता, अस्पताल, औषधालय और स्वास्थ्य सेवाएं, बैंकिंग, बीमा और वित्तीय संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और आवास सेवाएं आदि है। स्थाई लोक अदालत की आर्थिक और कानूनी सीमा एक करोड़ रुपये तक के वित्तीय विवादों की सुनवाई कर सकती है। इसके अलावा, यह केवल उन्हीं मामलों को स्वीकार करती है जो अभी तक किसी अन्य न्यायालय के समक्ष नहीं गए हैं। यह गंभीर या अशमनीय आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं कर सकती।
विद्वान अधिवक्ता  संजय कुमार अग्रवाल द्वारा बताया गया कि स्थाई लोक अदालत भारत में आम नागरिकों को बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों (जैसे बिजली बोर्ड, बीमा कंपनी, बैंक) के खिलाफ एक मजबूत और त्वरित सुरक्षा कवच प्रदान करती है। यह कम खर्चीली, त्वरित और सुलभ न्याय प्रणाली का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो भारतीय न्यायपालिका के समय और धन दोनों की बचत करती है। इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर जिला न्यायालय उरई के बार संघ जालौन की महासचिव साधना त्रिपाठी, सर्वश्री द्रगपाल सिंह परमार, विश्राम सिंह, शिव सिंह, अभिषेक पाठक, अशोक बाबू पाठक, सत्येन्द्र सिंह, रामजी, शिव कुमार श्रीवास्तव, यादवेन्द्र प्रताप सिंह,  सुनीता सिंह,  प्रदीप कुमार,  सच्चिदानन्द श्रीवास्तव,  मन्जूलता आदि विद्वान अधिवक्तागण उपस्थित रहे।

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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