28 मई को ईद-उल-अज़हा (बकरीद) मनाई जाएगी
कालपी (जालौन) दारुल उलूम गौसिया मजीदिया के नाज़िमें आला(प्रबन्धक) अल्हाज हाफिज इरशाद अशरफी ने बताया की इस्लामी साल का ये आखरी महीना है जिसे बकरीद के नाम से जाना जाता है, इस माहे मुबारक की बहुत ही शान है। इसका चांद नज़र आते ही हर दिल में उस अजीमुश्शान क़ुरबानी की याद ताजा हो जाती है कि जिसकी मिसाल कोई पेश नही कर सकता है। इसमें जो क़ुरबानी की जाती है ये हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की प्यारी सुन्नत है, उन्ही की सुन्नत को अदा करने के लिए मुसलमान अपने जानवरों की कुर्बानियां पेश करते है।
मुफ़्ती -ए-शहर मुफ़्ती अशफाक बरकाती ने बताया कि लोगो को अगर क़ुरबानी के मसाइल की जानकारी न हो तो उसे अपने उलमा-ए-किराम से पूछना चाहिए क्योंकि अक्सर ये देखा जाता है कि जो लोग साहिबे निसाब होते है वो क़ुरबानी नही करते है, और कुछ लोग होते हुए भी दूसरों के नाम पर क़ुरबानी करते है।
जबकि मसला ये है कि जो शक़्स साहिबे निसाब हो उसको अपने ऊपर क़ुरबानी वाजिब होती है, अब अगर किसी दूसरे के नाम से क़ुरबानी करना चाहता है तो फिर वो दो क़ुरबानी करेगा क्योंकि उसे तो अपने नाम से हर साल करनी ही होगी जबतक वो इसके निसाब तक रहेगा। और जो जानवर क़ुरबानी के लिए लाएं वो अच्छे खूबसूरत होना चाहिए। उन्होंने लोगो से अपील की है कि जहां भी क़ुर्बानी की जाएं उस जगह को खुला न होना चाहिए किसी शामयाने से उस जगह को पर्दा कर लें, और जानवरों के निकले हुए मलवे को नालियों में या रोड पर न डाले जिन जगहों पर मलवा डालने का इंतिज़ाम नगर पालिका की तरफ से किया गया हो उसी जगहों पर इसको डालें साफ-सफ़ाई का ख्याल रखें।
तकिये वाली मस्जिद के इमाम हाजी मुजीब अल्लामा ने कहा कि मैं अपने अधिकारियों से भी अपील करता हूँ कि वो इस त्योहार के मौके पर बिजली, पानी, साफ सफाई का पूरा माकूल इंतिज़ाम किया जाए।










