कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अब न्यूनतम दो शिक्षक अनिवार्य रूप से तैनात किए जाएंगे लेकिन जहां सरप्लस शिक्षक होंगे, उन अतिरिक्त शिक्षकों का या तो समायोजन किया जाएगा या दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा। इस संबंध में हाईकोर्ट के निर्णय के आधार पर शासन ने कार्यवाही शुरू कर दी है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद की संयुक्त पीठ ने 22 मई 2026 को समायोजन प्रक्रिया को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है हालांकि अभी अंतिम निर्णय आना शेष है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में समायोजन प्रक्रिया अब अनिवार्य रूप से फर्स्ट इन फर्स्ट ऑउट (जो पहले आया, वह पहले जाएगा/समायोजित होगा) के सिद्धांत पर आधारित होगी। जनपद स्तर पर सरप्लस शिक्षकों की सूची उक्त सिद्धांत के अनुसार ही तैयार की जाएगी। इस प्रकरण की अब अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी। उस दिन सरकार को बेंच के समक्ष शिक्षकों की सरप्लस सूची प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय ने अटैचड शिक्षकों का विवरण भी सरकार से मांगा है। न्यायालय की समीक्षा और अनुमति के बाद ही समायोजन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक पूरी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो जाती किसी भी शिक्षक को परेशान न किया जाए और न ही किसी को हटाया जाए।
शिक्षकों के लिए यह एक बड़ी कानूनी जीत है। न्यायपालिका ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थिरता सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। हाई कोर्ट के फाइनली आदेश के बाद ही जनपदीय समिति द्वारा किसी भी सरप्लस अध्यापक को किसी दूसरे विद्यालय में तैनात करने की कार्यवाही की जा सकेगी। नियमों के आलोक में यदि किसी महिला अध्यापिका को पुनः तैनात किए जाने की कार्यवाही की जानी है तो जिला स्तरीय समिति द्वारा यह ध्यान रखा जाएगा कि सर्वप्रथम उस महिला अध्यापिका को उसी विकासखण्ड में, यदि सम्भव नहीं है तो अध्यापिका की उसके निकटतम विकासखण्ड में जोकि सड़क से अच्छी तरह से जुड़ा हो में तैनात किये जाने की कार्यवाही की जाएगी।










