प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प, नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग से बढ़ेगी उपज और घटेगी लागत – जिलाधिकारी

 

धरती माता बचाओ अभियान एवं उर्वरक निगरानी समिति की जनपद स्तरीय कार्यशाला आयोजित, सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग का दिया गया प्रशिक्षण

कम मात्रा, सटीक पोषण, फसल हो भरपूर, अपनाइए इफको नैनो उर्वरक जरूर

जालौन। सहकारिता सप्ताह (29 जून से 06 जुलाई, 2026) के उपलक्ष्य में धरती माता बचाओ अभियान एवं उर्वरक निगरानी समिति के तत्वावधान में विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में जनपद स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह व जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह ने संयुक्त रूप से किया।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने तथा भूमि की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखने के लिए संतुलित एवं वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों का प्रयोग कम मात्रा में अधिक प्रभावी परिणाम देता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है, उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है तथा मिट्टी और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में नैनो उर्वरकों का अधिकाधिक उपयोग करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा इफको नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो जिंक एवं नैनो कॉपर के गुण, लाभ एवं प्रयोग विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि नैनो यूरिया प्लस फसलों में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाकर उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार करता है, जबकि नैनो डीएपी पौधों की प्रारंभिक वृद्धि, जड़ों के विकास तथा फास्फोरस की उपलब्धता को बढ़ाता है। नैनो जिंक पौधों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर कर फूल एवं फल बनने की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है तथा नैनो कॉपर फसलों को फफूंद, बैक्टीरिया एवं अन्य रोगों से सुरक्षा प्रदान करने के साथ पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। विशेषज्ञों ने किसानों को बीज उपचार, जड़ उपचार तथा पर्णीय छिड़काव की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी देते हुए बताया कि नैनो उर्वरकों का प्रयोग निर्धारित मात्रा एवं सही समय पर करने से पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है, उर्वरकों की खपत कम होती है तथा पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आती है। कार्यशाला में विभिन्न फसलों के अनुसार नैनो उर्वरकों के प्रयोग का समय, मात्रा एवं सावधानियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।
पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सुरक्षित कृषि पद्धतियों को अपनाना वर्तमान समय की आवश्यकता है। आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती किसानों की समृद्धि का आधार बनेगी।
जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह ने कहा कि सहकारिता विभाग किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों एवं गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने किसानों से सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
कार्यशाला में उपस्थित किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग से संबंधित पुस्तिकाएं वितरित की गईं तथा विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, इफको राज्य विपणन प्रबंधक यतेंद्र कुमार,
इफको रीजनल मैनेजर झाँसी राजेश कुमार, इफको क्षेत्र प्रतिनधि उरई शुभम मिश्रा, कृषि, सहकारिता एवं इफको के अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान एवं सहकारी समिति के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Jansan Desh 24
Author: Jansan Desh 24

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