रसूलाबाद कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का पांच वर्षीय कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने जा रहा है। कार्यकाल समाप्त होते ही वर्तमान ग्राम प्रधान भूतपूर्व प्रधान की श्रेणी में आ जाएंगे। इसे लेकर पंचायत राजनीति में हलचल तेज हो गई है और गांवों में चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। रसूलाबाद विकास खंड की 91 ग्राम पंचायतों में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं तथा कई प्रधानों के चेहरों पर तनाव और असमंजस के भाव साफ दिखाई देने लगे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय सबसे अधिक चर्चा आगामी पंचायत चुनावों को लेकर हो रही है। हालांकि चुनाव की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है लेकिन गांवों में संभावित प्रत्याशियों ने अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। जनता के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि इस बार बड़ी संख्या में वर्तमान प्रधान दोबारा जीत हासिल नहीं कर पाएंगे। ग्रामीणों का मानना है कि पिछले पांच वर्षों के कार्यों विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता से व्यवहार के आधार पर मतदाता इस बार अधिक सजग होकर मतदान करेंगे।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार पंचायत चुनावों में मतदाता सूची का मुद्दा भी काफी प्रभाव डाल सकता है। एसआईआर व्यवस्था के तहत ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं जो वर्षों से बाहर रह रहे थे और अन्य स्थानों पर भी मतदाता के रूप में पंजीकृत थे। पहले ऐसे कई मतदाता गांव की वोटर लिस्ट में भी बने रहते थे जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित होते थे। अब इस व्यवस्था के बाद वोटों का गणित बदलने की संभावना जताई जा रही है।
इसी कारण कई वर्तमान प्रधानों और संभावित प्रत्याशियों में बेचैनी भी देखी जा रही है। पंचायत स्तर पर जातीय और पारिवारिक समीकरणों के साथ-साथ विकास कार्य सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जनता के बीच सक्रियता इस बार चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब जनता केवल वादों के आधार पर नहीं बल्कि पिछले कार्यकाल के वास्तविक विकास कार्यों को देखकर अपना प्रतिनिधि चुनेगी। गांवों की चौपालों बाजारों और सामाजिक आयोजनों में चुनावी चर्चाएं अभी से तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवार लोगों के बीच पहुंचकर समर्थन जुटाने में लग गए हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बार पंचायत चुनाव पहले की अपेक्षा अधिक रोचक और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि मतदाता अब स्थानीय विकास पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रमुख मुद्दा मान रहे हैं।










