मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ० वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि हीट वेव की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है, तत्काल उचित उपचार उपलब्ध न होने स्थिति में प्रभावित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। हमेशा याद रखे, तेज बुखार, सिर दर्द मतली या उल्टी आना, घबराहट एवं चक्कर आना आदि हीट वेव/लू लगने के लक्षण होने पर तुरन्त नजदीकी चिकित्सालय में उपचार लें तथा हीट वेव के प्रभावों को कम करने के लिये निम्न तथ्यों पर ध्यान देना चाहिये। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक के लक्षण- गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना। तेज पल्स होना। उथले श्वास गति में तेजी। व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति। सिरदर्द, मतली, थकान और कमजोरी होना, चक्कर आना। मूत्र न होना अथवा इसमें कमी।
उन्होंने बताया कि क्या करें- अधिक से अधिक पानी पियें।पसीना सोखने वाले पतले व हल्के रंग के वस्त्र ही पहनें। धूप में जाने से बचें यदि धूप में जाना जरूरी हो तो चश्में, छाते, टोपी व चप्पल आदि का प्रयोग करें। यदि आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ-पैरों को गीले कपडे से ढके रहें और यदि सम्भव हो तो छाते का उपयोग करें। ओ०आर०एस० एवं घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (मांड), नीबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें ताकि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके। हीट स्ट्रोक (लू) के मुख्य लक्षणों में शरीर में कमजोरी का होना, चक्कर आना, सिर में तेज दर्द, उबकाई आना, पसीना आना, कैम्प (मरोडं / ऐंठन) और कभी-कभी मूर्छा (बेहोशी) आना प्रमुख है। इसके लिये तुरन्त चिकित्सक की सलाह लें। घरेलू/पालतू जानवरों को छायादार स्थानों पर रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पीने को दें। गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों व बुजुर्गों की विशेष देखभाल करें। उन्होंने बताया कि क्या न करें- धूप में खड़े वाहनों में बच्चों एवं पालतू जानवरों को न छोड़ें। दिन के 11 बजे से 3 बजे के बीच बाहर न निकलें। गहरे रंग के भारी एवं तंग वस्त्र पहनने से बचें। खाना बनाते समय कमरे के दरवाजे के खिडकी एवं दरवाजे खुलें रखें जिससे हवा का आना जाना बना रहें। नशीले पदार्थ, शराब तथा अल्कोहल के सेवन से बचें। उच्च प्रोटीन युक्त खाद्वय पदार्थ का सेवन करने से बचें। बासी भोजन न करें। भारी कार्य तथा ज्यादा शारीरिक व्यायम से बचें।











