हमीरपुर–जालौन बॉर्डर की खदानों में अवैध खनन के गंभीर आरोप नदी की धारा चीरकर पोकलेन मशीनों से मौरंग निकासी का दावा
पट्टा क्षेत्र से बाहर रात के अंधेरे में खनन की शिकायतें अधिकारियों की कथित मिलीभगत, कार्रवाई न होने से उठे सवाल
लिखित शिकायतों के बावजूद ठोस कदम नहीं, ग्रामीणों में रोष ट्रक मालिकों का सवाल: कार्रवाई सिर्फ हम पर, पट्टाधारक क्यों बच रहे?
रात्रिकालीन चेकिंग के बावजूद ओवरलोडिंग और अवैध खनन जारी समान कार्रवाई की मांग, खदान संचालकों पर भी हो जिम्मेदारी तय
उत्तर प्रदेश के जालौन और हमीरपुर जनपद की सीमा पर संचालित खदानों में अवैध खनन होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और ट्रक मालिकों का कहना है कि खनन पट्टे की निर्धारित सीमा से बाहर पोकलेन मशीनों द्वारा नदी की धारा को चीरते हुए अवैध तरीके से मौरंग निकाली जा रही है। यह कार्य प्रायः रात के अंधेरे में किया जाता है।
बताया जा रहा है कि चुनोट गांव के आसपास संचालित खदानों में पट्टा क्षेत्र से अतिरिक्त खनन कर माल बेचा जा रहा है। इस दौरान आए दिन हादसे भी होने की बात सामने आती रही है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह अवैध खनन निर्बाध रूप से जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार लिखित शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप यह भी है कि “सुविधा शुल्क” के चलते दोनों जनपदों के अधिकारियों की अनदेखी से यह कार्य चलता रहा है।
ट्रक मालिकों ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे खदान से विधिवत मौरंग खरीदकर लाते हैं, लेकिन रास्ते में वाहन पकड़े जाने पर कार्रवाई केवल ट्रक मालिकों पर होती है। उनका सवाल है कि यदि खनन अवैध है तो खदान संचालकों और पट्टाधारकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती, जबकि जिम्मेदारी दोनों पक्षों की बनती है।
सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जालौन जनपद में रात्रिकालीन मौरंग चेकिंग अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
ट्रक मालिकों और ग्रामीणों की मांग है कि यदि कार्रवाई की जाए तो खदान पट्टाधारकों पर भी समान रूप से की जाए, ताकि अवैध खनन पर वास्तविक नियंत्रण स्थापित हो सके।












