कानपुर देहात। खरीफ फसल के अंतर्गत धान की रोपाई के दृष्टिगत किसानों को समय से एवं निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी कपिल सिंह द्वारा समस्त साधन सहकारी समितियों पर नामित अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण कराया गया।
जिलाधिकारी द्वारा जारी कार्यालय ज्ञाप के अनुपालन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को विकास खंडवार साधन सहकारी समितियों का निरीक्षण करने हेतु नामित किया गया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने समितियों पर यूरिया, डीएपी, एनपीके सहित अन्य उर्वरकों की उपलब्धता, स्टॉक की स्थिति, वितरण व्यवस्था तथा किसानों को निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराए जाने की विस्तृत जांच की।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उर्वरक विक्रय केंद्रों के स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजिका, पीओएस मशीन के माध्यम से किए जा रहे वितरण, प्रति किसान वितरित उर्वरक की मात्रा तथा फर्टिलाइजर रजिस्टर का भी परीक्षण किया। साथ ही यह भी देखा गया कि विक्रय केंद्रों पर उर्वरकों की निर्धारित दरों का बोर्ड प्रदर्शित है अथवा नहीं तथा किसानों को शासन द्वारा निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार निरीक्षण दलों ने मौके पर उपस्थित किसानों एवं आसपास के ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उर्वरक की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था तथा किसी प्रकार की असुविधा या शिकायत के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के उपरांत सभी अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप पर अपनी जांच आख्या एवं संक्षिप्त निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
जिलाधिकारी कपिल सिंह ने कहा कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उर्वरकों की कृत्रिम कमी उत्पन्न करना, कालाबाजारी करना अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि निरीक्षण के दौरान किसी समिति अथवा विक्रय केंद्र पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे केवल अधिकृत विक्रय केंद्रों से ही उर्वरक क्रय करें, निर्धारित मूल्य पर ही खरीदारी करें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता, अधिक मूल्य वसूली अथवा उर्वरक उपलब्ध न होने की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों अथवा जिला प्रशासन को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।












