गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशकों की तय होगी जवाबदेही
कानपुर देहात। प्राथमिक विद्यालय मदारपुर में आयोजित अकबरपुर संकुल की बैठक में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार पाण्डेय ने प्रधानाध्यापकों की कार्यशैली को विद्यालय की प्रगति की मुख्य चाबी बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व क्षमता वाले प्रधानाध्यापक समान बजट और सीमित संसाधनों में भी विद्यालय को आदर्श बना देते हैं जबकि शिथिल रवैये के कारण पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद व्यवस्थाएं पटरी से उतर जाती हैं। बीएसए ने प्रधानाध्यापकों को विद्यालय की भौतिक और शैक्षणिक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रत्येक शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यदि विद्यालय स्टाफ या व्यवस्थाओं में कोई बाधा आती है तो प्रधानाध्यापक तत्काल उच्च अधिकारियों को इससे अवगत कराएं। बैठक में मौजूद एसआरजी अनंत त्रिवेदी एवं अन्य शिक्षाविदों ने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए निपुण भारत मिशन के तहत नए लक्ष्यों के विस्तारीकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के 10 बिंदुओ और कैच-अप शिक्षण के 15 बिंदुओ पर जानकारी दी। निपुण लक्ष्य ऐप और निपुण तालिका के शत-प्रतिशत प्रयोग के बारे में बताया।
इस बैठक के दौरान जिला समन्वयक देवेश धर दुबे, जगदीश कुमार, नीरा सिंह, कंचन यादव, मधु द्विवेदी, सुलेखा श्रीवास, स्नेहलता सचान, संगीता मिश्रा, मनोज तिवारी, माखन सिंह पाल, सुरेंद्र कटियार, अनुराग श्रीवास्तव, दिनेश पाठक, ज्ञान सिंह और सुधाकर विक्रम सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।










