रसूलाबाद कानपुर देहात। 2027 की शुरुआती महीनों में उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसको लेकर अब विधानसभा क्षेत्र में अच्छी खासी हलचल देखने को मिलने लगी है। जहां क्षेत्र में वर्तमान विधायक पूरी ताकत झोंकने में लगे हुए हैं तो संभावित दावेदार भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। भारतीय जनता पार्टी संगठन से लेकर कार्यकर्ताओं से जन संवाद का खुद से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। जिसको लेकर रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है।
रसूलाबाद क्षेत्र में दावेदारों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। रसूलाबाद क्षेत्र के तिश्ती गांव निवासी भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि जगदेव कुरील इन दिनों लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे हैं। स्थानीय होने का उन्हें सीधा लाभ मिलता दिख रहा है, क्योंकि क्षेत्र की जनता से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। वे वर्ष 1995 से लगातार राजनीति में सक्रिय हैं और जमीनी स्तर पर काम करते रहे हैं।
जगदेव कुरील की राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनकी पत्नी सरला देवी, जिला पंचायत सदस्य रहते हुए सुनासी क्षेत्र में कई विकास कार्य करा चुकी हैं। इनमें लगभग 25 आरसीसी सड़कें, खरंजा और पुलिया निर्माण के साथ-साथ जलभराव की समस्या से जूझ रहे गांवों में करीब 10 नालों का निर्माण शामिल है। इसके अलावा मऊ गाँव में एक आदर्श सरोवर का निर्माण भी कराया गया।
इन विकास कार्यों ने जगदेव कुरील परिवार को क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है। साथ ही जनता के बीच उनकी उपलब्धता और सक्रियता उन्हें अन्य संभावित दावेदारों से अलग बनाती है। तिश्ती गांव में निवास होने के कारण स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है।
हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन रसूलाबाद की सियासत में जगदेव कुरील का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। जगदेव कुरील की जमीन स्तर पर मजबूत पकड़ बताई जाती है। 2021 में हुए जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में उन्होंने सामान्य सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी पत्नी सरला देवी को ऐतिहासिक 3785 मतों से प्रिया विपिन शुक्ला को हराकर चुनाव जिताया था। जिसकी चर्चा पूरी विधानसभा क्षेत्र में खूब होती है। जिस समाज से वे आते हैं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से लगातार उस समाज के दो बार विधायक बन चुके हैं। इसको लेकर भी भाजपा के संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में भी उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। फिलहाल क्षेत्र की गली-गली, चौराहों और चाय की दुकानों पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो चुकी हैं, जो आने वाले समय में और भी रोचक होने की संभावना जताती हैं।









