उरई। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी समीर ने मतदाताओं से फार्म-7 भरते समय सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश और भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार निर्वाचक नामावली से नाम हटाने या नाम शामिल करने के संबंध में आपत्ति दर्ज कराते समय गलत जानकारी देना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के 9 अक्टूबर 2026 के पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जांच में फार्म-7 के माध्यम से की गई शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई जाती है, तो जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करने वाले आवेदक के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इस धारा के अंतर्गत निर्वाचक नामावली तैयार करने, उसके पुनरीक्षण या संशोधन अथवा किसी मतदाता का नाम शामिल करने या हटाने के संबंध में जानबूझकर गलत लिखित बयान या घोषणा करने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।
जिलाधिकारी ने मतदाताओं से अपील की है कि फार्म-7 भरते समय सही तथ्यों और अपनी जानकारी के आधार पर ही आवेदन करें। निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गलत या झूठी जानकारी देने से बचें और आयोग के निर्देशों का पालन करें।













