कालपी (जालौन) तहसील कालपी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला आटा से अकोड़ी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पिछले लंबे समय से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लगभग 4 किलोमीटर लंबा यह संपर्क मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्याप्त है। सड़क की खस्ताहाल स्थिति के कारण क्षेत्र के लोगों का जीना मुहाल हो गया है और वे जल्द से जल्द इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।
अकोड़ी निवासी शिक्षक योगेश पाण्डेय सहित अनेक ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग पर चौबीसों घंटे भारी वाहनों का आवागमन बना रहता है। क्षमता से अधिक लोड लेकर गुजरने वाले इन वाहनों के कारण डामर की सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है और अब वहां सिर्फ गहरे गड्ढे ही नजर आते हैं। स्थिति यह है कि वाहन चालकों को यह समझ नहीं आता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। कई स्थानों पर तो इतने गहरे और खतरनाक गड्ढे हो चुके हैं कि आए दिन दोपहिया और तिपहिया वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
यह मार्ग केवल दो गांवों को ही नहीं जोड़ता, बल्कि यह आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के हजारों लोगों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग (लाइफलाइन) है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, अपनी उपज लेकर मंडी जाने वाले किसान, बुजुर्ग और मरीज इसी मार्ग से होकर तहसील व जिला मुख्यालय तक का सफर तय करते हैं। सड़क खराब होने के कारण जहां समय की बर्बादी होती है, वहीं वाहनों में भी तकनीकी खराबी आ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब वर्षाकाल (मानसून) शुरू होने में बहुत कम समय बचा है। यदि बारिश से पहले इस मार्ग की सुध नहीं ली गई, तो इन गड्ढों में पानी भर जाएगा। ऐसी स्थिति में सड़क पूरी तरह से तालाब का रूप ले लेगी, जिससे पैदल चलना भी असंभव हो जाएगा और हादसों का ग्राफ कई गुना बढ़ जाएगा। शिक्षक योगेश पाण्डेय और क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन व पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) से पुरजोर मांग की है कि बारिश शुरू होने से पहले ही इस संवेदनशील मामले को संज्ञान में लिया जाए।
क्षेत्र के आक्रोशित ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अब इस बदहाली को और अधिक बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र ही इस 4 किलोमीटर लंबे मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं कराया, तो वे जनहित में उग्र आंदोलन, चक्का जाम और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
आर . एन. शुक्ला पत्रकार













