कानपुर देहात अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार मौर्य ने बताया कि विगत दिवसो में देखा गया है कि जनपद में डूबकर हुयी मृत्यु की घटनाओं में बढोत्तरी हुयी है, जिसमें बच्चें, किशोर, बजुर्ग शामील है। बढ़ती गर्मी से राहत पाने के लिए नदीयों, घाटो, तालाबों में जाकर स्नान करते है और थोडी सी चूक के कारण अपनी जान गवां देते है जिससे संबंधित परिवार के लिये त्रासदी बन जाती है। इन बहुमूल्य जीवन को बचाने हेतु जारी दिशा निर्देश क्या करें-क्या न करें।
•घाटो, तालाबों पर रहते समय शारीरिक व मानसिक रूप से सजग रहे।
•यदि तैरना जानते हों तभी नदीयों, तालाबों, घाटों के किनारे जायें।
•डूबते हुए व्यक्ति को धोती, साडी, रस्सी, या बांस के सहायता से बचायें, पानी में न जायें सहायता के लियें अन्य लागो को पुकारें।
•किसी नयें स्थान पर नदी में जाने से पहले नदी की गहराई का ध्यान अवश्य रखें।
•डूबे व्यक्ति को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाने हेतु 112 पर कॉल करें।
•बच्चों को पुल, तालाब, नदी, गड्डो तथा तेज पानी के बहाव में स्नान करने से रोके।
•बच्चों को पुल/ऊँचे टीलों से पानी में छलांग लगाकर नहाने से रोके।
•नदीयों/ तालाबों में स्नान करते वक्त सेल्फी लेने से रोके।
यदि तैरना नही जानते हों तो नदीयों, तालाबों, घाटों के किनारे न जायें।
•नदीयों/ तालाबों में स्नान करते वक्त खेल कुद न करें।
किसी के बहकावे में आकर गहरे पानी में न जाये।
डूबते व्यक्ति को पानी से बाहर निकालकर तत्काल प्राथमिक ऊपचार इस प्रकार करें।
•सबसे पहले ये सुनिश्चित करें कि डूबे हुए व्यक्ति के मुंह में कुछ फंसा तो नही है, यदि है तो उसे बाहर निकाले।
•नाक व मुंह पर उंगलियों के स्पर्श से जांच कर लें कि व्यक्ति की सांस चल रही हैं।
•नब्ज की जाँच करने हेतु गले के किनारे के हिस्सों में उंगलियो से छूकर जानकारी प्राप्त करें कि नब्ज चल रही है कि नहीं।
•नब्ज व सांस का पता नही चलने पर डूबे व्यक्ति के मुंह से मुंह लगाकर दो बार भरपूर सांस दें तथा लगातार 30 बार छाती के बीच में दबाव दें तथा इस प्रक्रिया को 3-4 बार दुहराएं। ऐसा करने से धड़कन वापस आ सकती है व सांस चलना शुरू हो सकती है।
•मुर्छा या बेहोश होने पर पुनः सांस देने व छाती पर दबाव देने की प्रक्रिया शुरू करें।
•उपरोक्त प्रक्रिया के बाद बचाए गयें व्यक्ति को अविलम्ब नजदीकी प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पर ले जाएँ।








