कानपुर देहात | परिवहन आयुक्त उ०प्र० के निर्देशानुसार उप सम्भागीय परिवहन कार्यालय, कानपुर देहात द्वारा सारथी भवन में समस्त वाहन डीलरों, मोटर गैराज एवं वर्कशॉप संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित सभी संचालकों को मोटरयान अधिनियम, 1988 के प्रासंगिक विधिक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई।
बैठक में स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया कि मोडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न/हूटर की बिक्री अथवा वाहनों में स्थापना ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा देती है, जो विधि विरुद्ध है। ऐसे मामलों में मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 182A(3) के अंतर्गत संबंधित वर्कशॉप/गैराज संचालक पर प्रति संघटक ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) तक का जुर्माना अधिरोपित किया जा सकता है। इस जुर्माने के शमन की शक्ति उप परिवहन आयुक्त एवं उनसे उच्च अधिकारियों में निहित है।
इसके अतिरिक्त, यदि कोई वाहन स्वामी अपने वाहन में अनधिकृत परिवर्तन (अल्ट्रेशन) कराता है, तो उसके विरुद्ध धारा 182A(4) के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी, जिसमें छः माह तक का कारावास अथवा प्रत्येक परिवर्तन पर ₹5,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे वाहन को सार्वजनिक स्थान पर चलाता/चलवाता है, जिससे सड़क सुरक्षा, शोर नियंत्रण एवं वायु प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन होता है, तो उसके विरुद्ध धारा 190(2) के अंतर्गत कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। इस धारा के तहत प्रथम अपराध पर तीन माह तक का कारावास अथवा ₹10,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों, साथ ही तीन माह के लिए ड्राइविंग लाइसेंस से अयोग्यता (Disqualification) का प्रावधान है। जिन वाहनों में मोडिफाइड साइलेंसर/ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले उपकरण पाए जाते हैं और जिनका चालान किया गया है, उनके विरुद्ध धारा 53(1) के अंतर्गत पंजीयन प्रमाण-पत्र (RC) के निलंबन की कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। जनपद कानपुर देहात के समस्त वाहन स्वामियों, डीलरों, मोटर गैराज एवं वर्कशॉप संचालकों से अपील है कि वे मोडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न, हूटर आदि की बिक्री/स्थापना न करें और न ही अपने वाहनों में ऐसे उपकरण लगवाएं। अन्यथा नियमानुसार कठोर विधिक कार्यवाही की जाएगी।













