कानपुर देहात के राजपुर में स्थित कथरी गांव का प्राचीन मां कात्यायनी देवी मंदिर नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। भोर से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दूर-दराज जिलों से आए श्रद्धालु माता के दरबार में माथा टेककर मनोकामनाएं मांगते हैं।
1000 वर्ष पुराना इतिहास और आस्था की अनोखी कहानी
कथरी गांव की पहचान मां कात्यायनी देवी के मंदिर से जुड़ी है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 1000 वर्ष पूर्व एक राजा देवी की मूर्ति को रथ में लेकर जा रहे थे, लेकिन सुनाव नाला के पास रथ फंस गया। लाख प्रयासों के बावजूद रथ आगे नहीं बढ़ पाया। तब एक बुजुर्ग सेनापति की सलाह पर मूर्ति को करील के पेड़ के नीचे स्थापित कर दिया गया। इसके बाद गांव के लोगों ने पूजा शुरू कर दी।
मन्नत पूरी होने पर हुआ मंदिर निर्माण
अंग्रेजी शासन काल में शाहजहांपुर के जमींदार पंडित गजाधर संतान सुख से वंचित थे। मां कात्यायनी की महिमा सुनकर उन्होंने मंदिर में मन्नत मांगी, जो पूरी होने पर उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया।
पीढ़ियों से चल रही सेवा
मंदिर के पुजारी श्री बाबू भट्ट के अनुसार उनका परिवार नौवीं पीढ़ी से मां की सेवा कर रहा है। पूरे वर्ष यहां धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं।











