कालपी(जालौन) पवित्र पावन धार्मिक नगर कालपीधाम के उत्तर पश्चिम मदारपुर में प्राचीन मत्स्य गंधापुर व्यास क्षेत्र स्थित है।महिर्ष वेद व्यास का जन्म दो नदियों के बीच द्वीप पर होने से उनका नाम द्वैपायन पड़ा।कालपी में यह क्षेत्र आज भी व्यास मन्दिर के नाम से मौजूद है।इसमें एक ओर यमुना बह रही है तो दूसरी ओर व्यास गंगा बह रही है। इसी क्षेत्र में टीले पर स्थित महिर्ष बेद व्यास स्मारक का शिलान्यास उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्पाल महामहिम श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी के कर कमलों द्वारा मिती फाल्गुन सम्बत 2009 तदनुसार 30जनवरी 1953 को सम्पन्न हुआ था। उक्त अवसर पर क्रतज्ञता व्यक्त करते हुए श्री मुंशी ने कहा था कि भगवान व्यास की जन्म भूमि कालपी आकर में भाव विहवल हो गया हूं ,आज मुझे अत्यन्त हर्ष है कि भगवान श्री वेद व्यास जी के जन्म स्थान की रज सिर पर चढ़ाकर क्रतार्थ हो गया हूं
प्रिय जनों भगवान शिव व देवी पार्वती के पुत्र गणेश भगवान ने वेद व्यास के मुख से निकली वाणी और वैदिक ज्ञान को लिपि वद्ध करने का कार्य किया था ताकि आम जनों को समझने में आसानी हो साथ ही महिर्ष बेद व्यास ने अपने वैदिक ज्ञान को चार हिस्सों में विभाजित कर दिया और वेद व्यास कहलाए।
व्यास जी का उद्देश्य महाभारत लिखकर युद्ध का वर्णन करना नहीं बल्कि भौतिक जीवन का नि: सारता को दिखाना है।महिर्ष बेद व्यास न केवल महाभारत के रचयिता हैं बल्कि उन घटनाओं के भी साक्षी रहे हैं जो क्रमानुसार घटित हुई हैं। इस महान धार्मिक ग्रंथ में व्यास जी की एक अदत भूमिका है । वेदव्यास उन मुनियों में एक हैं जिन्होंने अपने सत्हित्य और लेखन के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को यथार्थ और ज्ञान का खजाना दिया है।
महिर्ष बेद व्यास ने समस्त विवरणों के साथ महाभारत ग्रंथ की रचना कुछ इस प्रकार की है कि यह एक महान इतिहास बन गया है। हिन्दू धर्म मे मान्यता है कि महाभारत मे उल्लिखित सत्य और प्रमाणिक व्रतांत है।व्यास जी ने 4 वेद 6 शास्त्र और 18 पुराणों की रचना की है।
व्यास जयंती बसन्त पंचमी के पावन पर्व पर गुरु ओं के गुरू महिर्ष वेद व्यास जी के चरणों में सत सत नमन करते हैं।











