इप्टा के कलाकारों के प्रस्तुतीकरण को जमकर सराहा
कालपी (जालौन) रविवार को सांस्कृतिक संस्थाओं इप्टा कालपी तथा इप्टा उरई के संयुक्त तत्वधान में 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम की नायिका वीरांगना लक्ष्मीबाई की स्मृतियों में दस्तानगोई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किस्सा ए अशफाक व पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जीवनी को सुना कर क्रांतिकारी इतिहास पर प्रकाश डाला गया।
यमुना नदी के तट में स्थित मंडलीय खादी ग्रामोद्योग प्रशिक्षण कालपी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में आप्टा के संयोजक कामरेड देवेंद्र शुक्ला ने अपने सम्बोधन में कहा कि देश को आजाद कराने वाले क्रांतिकारियों की साझा शहादत – साझा विरासत को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने जनपद जालौन की क्रांतिकारी इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वीरांगना लक्ष्मीबाई ने आखिरी दिनों में कालपी की इसी धरती में क्रांतिकारियों के साथ मंत्रणा करके अंग्रेजी शासन के खिलाफ युद्ध का बिगुला फूंका था।
इसी कार्यक्रम में लखनऊ से पधारी सांस्कृतिक संस्था के सदस्यों ने राष्ट्र भक्ति का तराना प्रस्तुत करते हुते पढ़ा
हक परस्ती अपनी आन है।
हक परस्ती अपनी शान है।
हक परस्ती पर हमारी हर कला कुर्बान है।
कार्यक्रम में लखनऊ सांस्कृतिक संस्था के संयोजक शहज्ञाद रिजवी व फरजाना महंदी ने अपने अपने तराने के माध्यम से अश्फाक उल्ला खां एवं रामप्रसाद बिस्मिल के अंग्रेजी शासन के खिलाफ जंग, काकोरी काण्ड,जेल यात्रा, फांसी तक की सम्पूर्ण जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किस्सागोई या दास्तानगोई की परम्परा खत्म होती जा रही है। किस्सागोई की परम्परा तथा विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी संस्था रामो वामो क्लब कालपी के अध्यक्ष महेन्द्र कुमार गौतम ने किया। कार्यक्रम संयोजक नरेंद्र तिवारी ने कलाकारों को शाल ओढ़ाकर तथा फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष प्रतिनिधि नवीन गुप्ता,नरेंद्र यादव, रमेश, संजय पुरवार, मोहम्मद आजाद, शिवलाल वर्मा, शैलेंद्र, सुंदर महाराज, देवेंद्र शुक्ला, सुभाष चंद्र, दीपेंद्र, अमित कुमार, मनोज चतुर्वेदी, बृजेंद्र सिंह, सलीम अंसारी, अमित यादव,पवनदीप निषाद, शिव कुमार सोनी, मोहम्मद अयूब, संजीव आदि लोग प्रमुख रूप से शामिल रहे।











