जनगणना-2027 राष्ट्रीय दायित्व, शुद्ध एवं विश्वसनीय आंकड़े विकास योजनाओं का आधार: जिलाधिकारी
प्रगणक एवं सुपरवाइजर पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करें जनगणना कार्य
22 अक्टूबर से 06 नवंबर तक 14 बैचों में होगा प्रशिक्षण, 16 नवंबर से 30 नवंबर तक स्व-गणना एवं 01 दिसंबर से 04 जनवरी तक जनसंख्या गणना
कानपुर देहात। भारत की जनगणना-2027 के द्वितीय चरण के तहत जनसंख्या गणना के लिए नियुक्त प्रगणकों और सुपरवाइजरों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आज प्रभात इंजीनियरिंग कॉलेज, बारा, अकबरपुर, कानपुर देहात में आयोजित किया गया। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया
कार्यक्रम का उद्देश्य जनगणना कार्य में लगे कार्मिकों को प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्थाओं, निर्धारित प्रपत्रों, नागरिकों से संवाद और आंकड़ों के संकलन से संबंधित आवश्यक जानकारी देना है। इससे जनगणना कार्य को शुद्धता, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ पूरा कराने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार मौर्य, उपजिलाधिकारी अकबरपुर, तहसीलदार अकबरपुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, मास्टर ट्रेनर, प्रगणक, सुपरवाइजर और अन्य प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत से हुई। इसके बाद जनगणना-2027 के महत्व, उद्देश्य और निर्धारित कार्ययोजना की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने कहा कि भारत की जनगणना-2027 एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है। इसका सीधा संबंध देश की वर्तमान और भविष्य की विकास योजनाओं से है। जनगणना से प्राप्त विश्वसनीय, समावेशी और शुद्ध आंकड़े शासन की नीतियों, जनकल्याणकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया नहीं है। यह देश के प्रत्येक नागरिक, परिवार और क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
जिलाधिकारी ने सभी प्रगणकों और सुपरवाइजरों को निर्देश दिया कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक बिंदु को गंभीरता, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ समझें। जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से संबंधित जानकारी का सही, पूर्ण और निष्पक्ष संकलन किया जाना आवश्यक है। किसी व्यक्ति, परिवार, समुदाय या वर्ग के प्रति पूर्वाग्रह, भेदभाव अथवा असंवेदनशील व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कार्मिकों से कहा कि वे घर-घर जाकर नागरिकों से विनम्रतापूर्वक संवाद करें। उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनें और आवश्यक जानकारी प्राप्त करते समय उनकी गरिमा, निजता और भावनाओं का पूरा सम्मान करें। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी को गोपनीय रखा जाए। इसका उपयोग केवल जनगणना के निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जाए। प्रगणक किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी, अनावश्यक पूछताछ या असुविधाजनक व्यवहार से बचें। यदि किसी परिवार, बुजुर्ग, दिव्यांग व्यक्ति, अकेले रहने वाले नागरिक, महिला, प्रवासी परिवार या अन्य संवेदनशील समूह से संबंधित विशेष परिस्थिति सामने आती है, तो कार्मिक धैर्य और मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं। ऐसे मामलों में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि आंकड़ों की शुद्धता, निर्धारित समयसीमा का पालन और तकनीकी व्यवस्थाओं का सही उपयोग जनगणना कार्य की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कार्मिकों को निर्देश दिया कि निर्धारित प्रपत्र सावधानीपूर्वक भरें। मोबाइल एप्लीकेशन में जानकारी दर्ज करते समय प्रत्येक प्रविष्टि का सत्यापन करें। किसी त्रुटि की स्थिति में तत्काल सुपरवाइजर या संबंधित अधिकारी से मार्गदर्शन लें। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कार्य करते समय स्थानीय परिस्थितियों, भौगोलिक कठिनाइयों और नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखा जाए। किसी भी समस्या की सूचना समय से उच्चाधिकारियों को दी जाए।
मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल ने कहा कि जनगणना जैसे व्यापक और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य की सफलता मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले प्रगणकों और सुपरवाइजरों की दक्षता, तत्परता, अनुशासन और सटीकता पर निर्भर करती है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि प्रशिक्षण को केवल औपचारिकता न मानें। इसे पूरी गंभीरता से ग्रहण करें और अपनी शंकाओं का समाधान प्रशिक्षण के दौरान ही कर लें। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया, क्षेत्रवार कार्ययोजना, निर्धारित प्रपत्रों, मोबाइल एप्लीकेशन, स्व-गणना और जनसंख्या गणना से संबंधित सभी चरणों को अच्छी तरह समझने पर जोर दिया।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक प्रगणक अपने आवंटित क्षेत्र का पूर्व भ्रमण करे। इससे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, आवासीय क्षेत्रों, संस्थानों, दूरस्थ बस्तियों और संभावित कठिनाइयों की जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि सुपरवाइजर अपने अधीनस्थ प्रगणकों से नियमित संपर्क बनाए रखें। उनकी प्रगति की समीक्षा करें और आवश्यक मार्गदर्शन दें। किसी भी स्तर पर उत्पन्न समस्या को लंबित न रखा जाए। उसे तत्काल संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी कार्मिकों से आपसी समन्वय, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करने की अपील की।
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार मौर्य ने जनगणना के ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनगणना देश की सामाजिक, आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भौगोलिक स्थिति का महत्वपूर्ण आधार है।
जनगणना से प्राप्त आंकड़े शासन की योजनाओं के निर्माण, पात्र लाभार्थियों तक सुविधाएं पहुंचाने, संसाधनों के उचित वितरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, रोजगार संबंधी नीतियों तथा विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी होते हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य में प्रत्येक परिवार और व्यक्ति का समुचित समावेशन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कोई भी घर, परिवार या व्यक्ति गणना से छूटना नहीं चाहिए। किसी भी जानकारी को अनुमान के आधार पर दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रगणकों और सुपरवाइजरों से कहा कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों, प्रशिक्षण पुस्तिका और तकनीकी प्रोटोकॉल का पालन करें। उन्होंने गोपनीयता, निष्पक्षता, पारदर्शिता और नागरिकों के सम्मान को जनगणना कार्य का मूल आधार बताया। अपर जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना के दौरान नागरिकों के मन में उत्पन्न शंकाओं और आशंकाओं का शांतिपूर्वक और तथ्यात्मक ढंग से समाधान किया जाए। नागरिकों को जनगणना के उद्देश्य, प्रक्रिया और जानकारी की गोपनीयता के संबंध में आवश्यक जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि कार्मिकों का व्यवहार ही जनगणना के प्रति नागरिकों के विश्वास को मजबूत करेगा। इसलिए सभी प्रगणक विनम्र भाषा, संयमित आचरण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रगणकों और सुपरवाइजरों को जनगणना की संपूर्ण प्रक्रिया, कार्यप्रणाली और संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में क्षेत्रवार कार्य विभाजन, मकान सूचीकरण, परिवारों की पहचान, गणना प्रपत्र भरने की प्रक्रिया, स्व-गणना, जनसंख्या गणना, मोबाइल एप्लीकेशन के संचालन, डिजिटल प्रविष्टियों के सत्यापन और रिपोर्टिंग व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही प्रशिक्षणार्थियों को घर-घर जाकर नागरिकों से संवाद स्थापित करने का तरीका भी बताया जा रहा है। जानकारी प्राप्त करते समय बरती जाने वाली सावधानियों और संवेदनशील परिस्थितियों में व्यवहार की जानकारी दी जा रही है। संभावित कठिनाइयों, बंद या खाली मकानों, अस्थायी निवास, प्रवासी परिवारों, किरायेदारों, संस्थागत आवास और दूरस्थ क्षेत्रों से संबंधित प्रक्रियाओं पर भी चर्चा की जा रही है। ऐसे परिवारों के संबंध में भी जानकारी दी जा रही है, जहां सूचना प्राप्त करने में अतिरिक्त समय या सहयोग की आवश्यकता हो सकती है। प्रशिक्षण के दौरान कार्मिकों को आंकड़ों की शुद्धता, दोहराव से बचाव, छूटे हुए परिवारों की पहचान, समयबद्ध रिपोर्टिंग और अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं।
इस दौरान मास्टर ट्रेनर व्यावहारिक उदाहरणों, प्रश्नोत्तर सत्रों और तकनीकी अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों की समझ मजबूत कर रहे हैं। इससे वे वास्तविक क्षेत्रीय परिस्थितियों में आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण 22 अक्टूबर से 06 नवंबर 2026 तक 14 बैच में प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा जिसमें प्रत्येक बैच में 200 प्रगणक व सुपरवाइजर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।। इसके बाद स्व-गणना 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक कराई जाएगी। जनसंख्या गणना 01 दिसंबर 2026 से 04 जनवरी 2027 तक संपन्न कराई जानी निर्धारित है। संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूरी कराने को भी कहा गया है। प्रशिक्षण स्थल पर उपस्थिति, बैठने की व्यवस्था, तकनीकी संसाधन, प्रशिक्षण सामग्री, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं का समुचित प्रबंध सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों ने प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति, सहभागिता, प्रशिक्षण की प्रगति और उनकी शंकाओं के समाधान का समुचित अभिलेखीकरण करने के निर्देश दिए। प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट रखने और कार्ययोजना के अनुसार नियमित समीक्षा करने को कहा गया। जनगणना कार्य से संबंधित सूचनाओं के समयबद्ध आदान-प्रदान के लिए अधिकारियों और मैदानी कार्मिकों के बीच प्रभावी संचार व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सभी प्रगणकों और सुपरवाइजरों से जनगणना को राष्ट्रीय सेवा का महत्वपूर्ण अवसर मानकर कार्य करने की अपील की। उन्होंने पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन और मानवीय संवेदनशीलता के साथ दायित्वों का निर्वहन करने को कहा। उन्होंने कहा कि जनगणना की सफलता प्रत्येक कार्मिक की सजगता, जिम्मेदारी और नागरिकों के सहयोग पर निर्भर करती है। यदि सभी कार्मिक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और सम्मानजनक व्यवहार के साथ कार्य करेंगे, तो जनगणना-2027 का कार्य अधिक विश्वसनीय, सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकेगा।
इस दौरान नोडल मास्टर ट्रेनर के रूप में वर्तिका गुप्ता तथा फील्ड ट्रेनर के रूप में मनीष दीक्षित, अतुल श्रीवास्तव, रविंद्र सिंह, विराट पाठक, मनोज कुमार, सुजीत साहू, मोहित कुमार, राहुल व अन्य प्रशिक्षक प्रशिक्षण सत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है।











