कालपी (जालौन)। क्षेत्र के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर, मदरालालपुर के महंत कामता हरि सोमवार सुबह लगभग 10 बजे ब्रह्मलीन हो गए। उनके निधन का समाचार मिलते ही मदरालालपुर सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण और उनके अनुयायी मंदिर परिसर पहुंचे तथा उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
महंत कामता हरि लंबे समय से सूर्य मंदिर की देखरेख एवं धार्मिक व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे थे। उनके सानिध्य में मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का प्रमुख केंद्र बना, बल्कि सामाजिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण स्थल रहा। उनकी सादगी, सेवा भावना और धार्मिक जीवनशैली के कारण क्षेत्र के लोगों में उनके प्रति गहरी आस्था और सम्मान था। दूर-दराज के कई गांवों से श्रद्धालु नियमित रूप से उनके दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए मंदिर पहुंचते थे।
उनके ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही मदरालालपुर, कालपी तथा आसपास के अनेक गांवों से लोग मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। लोगों का कहना था कि महंत कामता हरि के निधन से मंदिर की देखरेख और धार्मिक गतिविधियों को बड़ी क्षति पहुंची है तथा उनके अभाव की भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।
पूर्व सैनिक एवं कालपी निवासी हरिराम निषाद ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि महंत कामता हरि का जीवन धर्म, सेवा और जनकल्याण के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा कि उनका निधन पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वहीं बबलू निषाद सहित अनेक लोगों ने भी दुख व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत संत की आत्मा की शांति तथा शोकाकुल श्रद्धालुओं और अनुयायियों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
महंत कामता हरि के ब्रह्मलीन होने से क्षेत्र ने एक ऐसे संत को खो दिया, जिन्होंने वर्षों तक सूर्य मंदिर की सेवा करते हुए लोगों को धार्मिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया। उनके योगदान और सरल व्यक्तित्व को क्षेत्रवासी लंबे समय तक श्रद्धापूर्वक स्मरण करते रहेंगे।











