कार्तिक पूर्णिमा पर यमुना में स्नानार्थियों का उमड़ा जन सैलाभ
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नगर पालिका परिषद द्वारा की गई चाक चौबंद व्यवस्था
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पुलिस प्रशासन भी रहा मुस्तैद
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कालपी (जालौन) कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर यमुना नदी में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई । स्नान के बाद लोगों ने घाटों पर ही जप तप ,दान व मंदिरों में दर्शन पूजन कर सुख समृर्धि की कामना की । घाटों पर मेला भी लगा। सुबह चार बजे से ही घाटों पर भारी संख्या मे श्रद्धालु स्नान के लिए उमड़ पड़े ।
यमुना नदी के तीन घाटों श्री बिहारी जी किलाघाट, पीला घाट व श्री ढोड़ेश्वर घाट पर स्नान के लिए पुरुषों, महिलाओं व बच्चों का दिन भर तांता लगा रहा भक्तों ने जोश खरोश के साथ यमुना में डुबकी लगाई स्नान के बाद भक्तों ने यमुना घाटों पर बने मंदिरों मे भगवान के दर्शन कर जप तप पूजा पाठ व दान किया
सुबह चार बजे से ही कालपी क्षेत्र व दूर दराज से आये हुए हजारों की संख्या मे स्नान के लिए उमड़ पड़े।
वहीं नगर पालिका परिषद ने महिलाओं के लिए भी विशेष टेंट की वृयवस्था की गई जिसमें मातायें, बहिने स्नान के पश्चात कपड़े बदल सकें के साथ स्नानार्थियों की सुरक्षा हेतु यमुना मे जाल व वेरीकेटिंग की व्यवस्था की गई ।
व्यवस्थाओं की देखरेख मे न०पा०प०कालपी के अध्यक्ष अरविन्द यादव, अधिशासी अधिकारी अवनीश शुक्ला अपने अधीनस्थों के साथ नगर के घाटों पर व्यवस्थाओं को देखते हुए नजर आये साथ ही नगर का पुलिस प्रशासन भी घाटों पर पूरी तरह मुस्तैद नजर आया ।
महिलाओं ने स्नान के बाद तुलसी जी की आराधना व पूजन बड़े ही भक्ति भाव से किया । कार्तिक मास मे तुलसी आराधना का विशेष महत्व है पुराणों मे उल्लेख है कि कार्तिक मास का प्रमुख कार्य तुलसी पूजा है तुलसी का सेवन भी कल्याण मय कहा गया है । आयुर्वेद मे तुलसी को रोग हर कहा गया है तुलसी यमदूतों के भय से मुक्ति प्रदान करती है भक्ति पूर्वक तुलसी व मंजरी से भगवान का पूजन करने से अनंत लाभ मिलता है । कार्तिक मास मे तुलसी आरोपण का भी विशेष महत्व है भगवती तुलसी विष्णुप्रिया कहलाती हैं इसी प्रथा को ध्यान मे रखते हुए महिलाओं ने अपने अपने घरों में तुलसी जी का पूजन बड़े ही विधि पूर्वक कर अपनी तथा अपने परिवार की खुशहाली व सुख समृद्धि की कामना की ।
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विशेष –
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर ही गंगा नदी को मोक्षदायिनी स्वरूप प्राप्त हुआ था । पौराणिक तथ्यों के अनुसार महर्षि कपिल मुनि के आश्रम मे सगर पुत्रों द्वारा की गई धृष्टता की वजह से सगर पुत्र कपिल मुनि के श्राप वश भष्म हो गये थे । कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर पावन गंगा मां कपिल मुनि के आश्रम मे पहुंची थीं व सगर पुत्रों को मोक्ष प्रदान किया था तभी से इस कार्तिक पूर्णिमा पर जनमानस गंगा, यमुना आदि पवित्र नदियों मे मोक्ष के लिए स्नान की परम्परा का निर्वहन करता चला आ रहा है ।
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जनसंदेश 24
आर०एन०शुक्ला










