कानपुर देहात। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, कानपुर देहात डॉ. सुबोध कुमार ने समस्त पशुपालकों से अपील की है कि गाय एवं भैंस वर्गीय पशुओं में फैलने वाली वायरल संक्रामक बीमारी लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतें तथा समय पर उपचार कराएं। यह रोग मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी एवं जूं जैसे कीटों के काटने अथवा संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में 104 डिग्री फारेनहाइट से अधिक तेज बुखार, शरीर, गर्दन एवं पैरों की त्वचा पर गांठों का उभरना, आंखों एवं नाक से पानी या लार का गिरना, भूख कम लगना तथा पैरों में सूजन एवं दूध उत्पादन में अचानक गिरावट शामिल हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने पशुपालकों को सलाह दी है कि रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रभावित पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं की खरीद-फरोख्त एवं परिवहन न करें। स्वस्थ पशुओं का नजदीकी पशु चिकित्सालय में एलएसडी टीकाकरण अवश्य कराएं।
उन्होंने कहा कि बीमारी के लक्षण दिखने पर लापरवाही न बरतें और बिना योग्य पशु चिकित्सक की सलाह के किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या भारी इंजेक्शन का प्रयोग न करें। पशुशालाओं में नियमित साफ-सफाई रखें तथा मच्छर-मक्खियों की रोकथाम के लिए नीम की पत्तियों का धुआं करें और आवश्यकतानुसार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराएं।
पशुओं को पौष्टिक हरा चारा, दलिया एवं मिनरल मिक्सचर उपलब्ध कराएं तथा संक्रमित पशु का बचा हुआ चारा एवं पानी स्वस्थ पशुओं को न दें। यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाए तो उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करें तथा शव को खुले में या नदी-नालों के किनारे न छोड़ें।
डॉ. सुबोध कुमार ने स्पष्ट किया कि लम्पी वायरस पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलता है तथा अच्छी तरह उबाला गया दूध पीना पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने पशुपालकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम राजकीय पशु चिकित्सालय से संपर्क करने की अपील की।
पशुपालक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 तथा कंट्रोल रूम हेल्पलाइन नंबर 8840665060 पर भी सूचना दे सकते हैं।















