कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के करीब 1.86 लाख शिक्षकों को केंद्र सरकार से राहत मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट देने या शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा-23 में संशोधन कर पुराने शिक्षकों को राहत देने के सवाल पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि टेट पास करने का मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है इसलिए इसमें फिलहाल कोई ढील संभव नहीं है। पुराने शिक्षकों को भी किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी।
लोकसभा में पूछा गया था कि क्या पुराने शिक्षकों को टेट परीक्षा से राहत मिलेगी। लोकसभा में कर्नाटक के सांसद ई. तुकाराम ने सवाल पूछा था कि क्या केंद्र ने टेट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसके असर का आकलन किया था? क्या ऐसे शिक्षकों को राहत देने के लिए आटीई एक्ट 2009 की धारा 23 में संशोधन करने पर विचार हो रहा है? क्या शिक्षकों को कोई अंतरिम राहत दी जाएगी? केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इसके जवाब में कहा कि शिक्षकों की भर्ती और सेवा शर्तें राज्यों का विषय हैं इसलिए ऐसे शिक्षकों का डेटा राज्य सरकारों के पास होता है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के फैसले में स्पष्ट किया था कि टेट, आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यता है। आरटीई के दायरे में आने वाले स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टेट अनिवार्य है। इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 को राहत देते हुए टेट पास करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है। यानी शिक्षकों को अतिरिक्त एक साल मिला है।
राज्यों को साल में दो बार टेट कराने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि राज्य सरकारें और संबंधित प्राधिकरण हर साल कम से कम दो बार टेट आयोजित करने का प्रयास करें। दोनों परीक्षाओं के बीच करीब 6 महीने का अंतर होना चाहिए। इससे शिक्षकों को योग्यता पूरी करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। यानी अब यूपी समेत सभी राज्यों पर नियमित टेट कराने का दबाव बढ़ गया है। यूपी में अभी जुलाई में टीईटी की परीक्षा हुई थी। इस लिहाज से अब जनवरी 2027 में फिर से टीईटी की परीक्षा कराई जा सकती है।








