कालपी जालौन पचपिंडा देवी मां देवी ने भक्त प्रबंधक को अपने को सुशोभित करने के लिए स्वपन देकर मंदिर को पुन: सुसज्जित करने के निर्देश दिए थे।
विदित हो कि पांडव ने नगर के मोहल्ला कागजीपुरा स्थित पचपन मठियों सहित मंदिर की स्थापना की थी उक्त मंदिर कई सालों बाद पूरी तरह से मंदिर में स्थापित मठिया पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण हो गई थी रावगंज निवासी पवन सुहाने उर्फ बाबी सुहाने पुत्र स्वर्गीय मुन्ना लाल सुहाने ने एक भेंट में अवगत कराया कि मंदिर स्थापित देवी मां से बड़ी आस्था थी वह मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते थे एवं मंदिर की देखभाल करते थे वही देवी मां ने अपना सच्चा शिष्य मानकर रात में स्वपन दिया कहां की मैं इसी तरह मंदिर में विराज मान रहूंगी मंदिर को सुशोभित करने के निर्देश दिए थे उन्होंने स्वयं तथा अपने मित्र बंधुओ से सहायता के रूप में धनराशि लेकर लगभग 25 लाख रुपए लगाकर मां देवी दरबार को सुशोभित किया था सुशोभित होने पर अपने शिष्य को ऊंचाइयों में जाने के लिए पूरा आशीर्वाद दिया तभी से उन्होंने मंदिर की शिष्य एवं प्रबंधक के रूप में कमान संभालते हुए देखभाल करने लगे वही 17 वर्ष मंदिर को सुशोभित करने के लिए हो गए थे पूरी तरह से मंदिर की देखभाल करना उनकी पहली प्रमुखता है मंदिर प्रबंधक ने पुजारी की पुत्री की शादी में लाखों रुपए खर्च कर बड़े धूमधाम से सकुशल तरीके से रीत रिवाज के तहत शादी संपन्न करायी प्रबंधक सुहाने ने पुनः महादेवी ने अपने सच्चे भक्त मंदिर की पुताई रंगाई के लिए स्वपन दिया था स्वपन उपरांत उन्होंने मंदिर को तत्काल कारीगर तथा लेबर लगाकर टीप टॉप कराया तथा पूरे मंदिर की रंगाई पुताई कराकर मंदिर को सर्वाधिक सुशोभित किया मंदिर में आने वाले भक्त पूजा अर्चना के बाद मां देवी से आशीर्वाद लेकर जब घर वापस होते हैं तो मंदिर को सुशोभित देखकर प्रबंधक सुहाने की भूर भूर प्रशंसा नगर में चहुओर होती हुई नजर आ रही है इतना भी नहीं मां देवी का सच्चा दरबार आज भी प्रसिद्ध है जो मा पचपिंडा देवी दरबार में पहुंचकर मनोकामना करते हैं मां भक्तों की पूरी मन्नत अवश्य होती है मंदिर में अन्य जनपदों एवं अन्य प्रातो आदि जगहों से सर्वाधिक भक्त आकर पूजा अर्चना करते हैं हजारों भक्तों की मां देवी के आशीर्वाद से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हुई है ऐसे भक्त मां देवी के सच्चे भक्त के रूप में सदैव दरबार में आकर पूजा अर्चना कर स्वयं तथा परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
पत्रकार सतीश द्विवेदी कालपी













