कानपुर देहात। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित नीट परीक्षा के पेपर में धांधली, लीक या अनियमितताओं के मुद्दे हर साल सामने आते हैं जिसे लेकर देश भर में आक्रोश और अविश्वास का माहौल बन जाता है। इस बार भी नीट यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई। एनटीए की आधिकारिक घोषणा के अनुसार लगभग 2205035 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी जो प्रतियोगिता के उच्च स्तर को दर्शाता है। इस वर्ष भी इस परीक्षा में धांधली के आरोप लग रहे हैं। परीक्षा के बाद राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने एक हस्तलिखित गैस पेपर (अनुमानित पेपर) के वायरल होने की जांच शुरू की है जिसमें से लगभग 150 प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों से मिलते-जुलते पाए गए हैं। आखिर नीट का पेपर हर बार लीक या विवादित क्यों हो जाता है? क्या इस कार्य को अंजाम देने के लिए कोई सक्रिय माफिया गिरोह सक्रिय है जो परीक्षा के कुछ घंटे पहले प्रश्न पत्र हासिल कर लेता है और उसे मोटी रकम में बेचता है। 2024 में बिहार और 2026 में राजस्थान (सीकर) से सामने आए मामले इसी का संकेत देते हैं। इस लीकेज प्रणाली में टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग लीक किए गए पेपर को तेजी से साझा करने के लिए किया जा रहा है जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया में बार-बार सुरक्षा चूक और अनियमितताएं सामने आई हैं। परीक्षा केंद्रों पर मिलीभगत, ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ या पेपर के वितरण में देरी प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है। 2026 में 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने लगभग 1 लाख से कुछ ज्यादा एमबीबीएस सीटों के लिए परीक्षा दी। अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और डॉक्टर बनने के दबाव के कारण, कुछ छात्र और अभिभावक किसी भी तरह परीक्षा पास करने के लिए गलत रास्ता अपनाने को तैयार हो जाते हैं। पेपर आमतौर पर परीक्षा के दिन परीक्षा केंद्र के अंदर या बैंक से परीक्षा केंद्र के रास्ते में लीक होते हैं जिसमें स्कूल सेंटर के कर्मचारी या केंद्र अधीक्षक शामिल हो सकते हैं। राजस्थान एसओजी को 150 प्रश्न ऐसे मिले जो वायरल गैस पेपर से मेल खाते थे जो कथित तौर पर परीक्षा से 42 घंटे पहले व्हाट्सएप पर वायरल हुआ था। एनटीए ने स्वीकार किया है कि उसे परीक्षा के बाद कथित धांधली की सूचना मिली थी और मामला केंद्रीय एजेंसियों को जांच के लिए भेज दिया गया है। छात्र और अभिभावक एक बार फिर से परीक्षा की पवित्रता पर सवाल उठा रहे हैं और देश भर में विरोध कर रहे हैं। यह समस्या एक व्यापक सिस्टम फेलियर है जिसमें माफिया, तकनीक, और सुरक्षा की खामियां मिलकर हर साल लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती हैं और जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।










