दिबियापुर नगर के रेलवे स्टेशन समीप स्थित विकास वैली रिसॉर्ट में शनिवार को क्षत्रिय समाज द्वारा वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने महाराणा प्रताप के चित्र पर तिलक, माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके बाद समाज के वरिष्ठजनों का माल्यार्पण कर स्वागत एवं सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सैनिक सत्यभान सिंह चौहान ने की, जबकि संचालन शिक्षक मानवेन्द्र सिंह गौर ने किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संघ औरैया के मनमोहन सिंह सेंगर ने कहा कि महाराणा प्रताप का जन्म वर्ष 1540 में राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था तथा उनका राज्याभिषेक 28 जनवरी 1572 को हुआ। उन्होंने हल्दीघाटी युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना का साहसपूर्वक सामना किया। उन्होंने चेतक की वीरता का वर्णन करते हुए बताया कि घायल होने के बावजूद चेतक ने महाराणा प्रताप की जान बचाने के लिए 22 फीट चौड़े नाले को पार किया था।
पूर्व सैनिक एसपी सिंह जादौन ने अपने संबोधन में कवि श्याम नारायण पांडेय की प्रसिद्ध पंक्तियों के माध्यम से चेतक और महाराणा प्रताप की वीरता का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
अध्यक्षता कर रहे सत्यभान सिंह चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। जंगलों में रहकर संघर्ष किया, घास की रोटियां खाईं, लेकिन मुगल सत्ता की अधीनता स्वीकार नहीं की।
पूर्व लेखाधिकारी डीजीएम दिबियापुर के.के. सिंह चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप चाहते तो अकबर से समझौता कर राजसी सुख-सुविधाएं प्राप्त कर सकते थे, लेकिन उन्होंने स्वाभिमान और क्षत्रिय परंपरा को सर्वोपरि रखा तथा संघर्ष का मार्ग चुना।
कार्यक्रम को नरेंद्र सिंह राजावत, राघवेंद्र सिंह सेंगर, पुष्पेन्द्र सिंह सेंगर, पंकज सिंह भदौरिया, रघुवीर सिंह भदौरिया एवं हरभूषण सिंह चौहान सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
इस अवसर पर सुंदर सिंह चौहान, महेंद्र सिंह सेंगर, शिव प्रताप सिंह, उदय प्रताप सिंह जादौन, राजा भदौरिया, अक्षय प्रताप सिंह भदौरिया, मुन्ना चौहान, योगेश चौहान, अवधेश सिंह सेंगर, संग्राम सिंह तोमर, अमन सिंह चौहान, अजय सिंह चौहान, ऋषि भदौरिया, शनि सेंगर, भूरे सिंह भदौरिया, पुष्पेंद्र सिंह, राघवेंद्र सिंह राजावत, डॉ. योगेन्द्र सिंह, आशू तोमर सहित सैकड़ों की संख्या में क्षत्रिय समाज के लोग उपस्थित रहे।












