कालपी जालौन – व्यास जन्मभूमि कालपी धाम मे स्थित प्राचीन देवालय श्री भीमसेनी हनुमान मंदिर में बलरामदास हरिदास महाराज द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के विश्राम दिवस में उमड़ा भारी जन सैलाब जहां परम श्रद्धेय राम श्याम महाराज ने बताया कि कालपी धाम की महिमा पौराणिक भी है और ऐतिहासिक भी चार वेद और अठारह पुराणों के रचयिता श्री वेदव्यास जी का जन्म इसी पावन भूमि मे हुआ जिन्होंने सनातन धर्म का ज्ञान लिपिबद्ध किया इस नगरी को भगवान श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने बसाया राम श्याम ने बताया अगर ऐतिहासिक दृष्टि से देखे तो देश की स्वतंत्रता का बिगुल भी यहीं से बजा रानी लक्ष्मीबाई तात्या टोपे नाना साहब इत्यादि वीर यही कालपी धाम मे स्थित मंत्रणा कक्ष मे बैठ कर अंग्रेजो के खिलाफ मंत्रणा बनाते थे आगे कथा का वर्णन करते हुए महाराज ने सुदामा चरित्र सुनाया की यदि जीवन में मित्र हो तो भगवान श्री कृष्ण जैसा जिन्होंने सुदामा का आपत्ति के समय दुख के समय भी साथ नहीं छोड़ा और आज जो मित्रता है वह केवल स्वार्थ की है सुख में सब साथ देते हैं लेकिन दुख में सब छोड़ जाते हैं तो यह मित्र नहीं कुमित्र है ऐसे मित्रों से दूर रहना चाहिए कथा सुनाते हुए राम श्याम महाराज ने बताया कि भगवान धर्म की रक्षा के लिए एवं अधर्म के विनाश के लिए अवतार लेते हैं और धर्म की स्थापना करके भगवान अंत में इसी भागवत महापुराण में शब्दमय विग्रह के रूप में स्थापित हो गए और राजा परीक्षित ने सुकदेव महाराज का व्यास पूजन किया सुकदेव अंतर्ध्यान हो गये राजा परीक्षित का भी उद्धार हो गया महाराज ने बताया भगवान की कथा का कभी अंत नहीं होता हरि अनंत हरि कथा अनंता तो कथा का कभी अंत नहींं है कथा को मिलता है विश्राम इस कथा के यजमान देवीदीन सविता एवं समस्त भक्तजन श्रोताओं में मुख्य रूप से सभासद राकेश यादव पवन पांडेय कमल सोनी राजा निषाद अमन दिनेश श्रीवास्तव कुलदीप तिवारी एवं समस्त भक्तजन मौजूद रहे।
पत्रकार सतीश द्विवेदी कालपी









