कानपुर देहात माननीय मंत्री राकेश सचान ने एमएसएमई क्षेत्र को देश की आर्थिक वृद्धि का “vital engine of economic growth” बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के समग्र विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। उन्होंने बताया कि उच्च-संभावना वाले एमएसएमई उद्यमों को “भविष्य के चैम्पियन” के रूप में विकसित करने हेतु ₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से नवाचार, विस्तार (scale), गुणवत्ता, निवेश, रोजगार-सृजन एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले एमएसएमई को इक्विटी सहायता प्रदान की जाएगी। यह फंड निजी निवेश को आकर्षित कर एमएसएमई को तेजी से विस्तार हेतु आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराएगा, जिससे छोटे उद्योग वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे। उन्होंने बताया कि Self Reliant India Fund में ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप किया गया है, जिससे एमएसएमई इकाइयों को जोखिम पूंजी (risk capital) की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही, पारंपरिक उद्योगों को पुनः प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से 200 legacy industrial clusters के पुनरुद्धार का कार्यक्रम लाया गया है, जिसके अंतर्गत बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, बिजली व लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में सुधार, तकनीकी उन्नयन, सामान्य परीक्षण केंद्रों की स्थापना तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे उत्पादकता में वृद्धि, लागत में कमी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे बुनकर बस्तियों, हस्तकरघा, हैंडीक्राफ्ट, धातु एवं चमड़ा उद्योग जैसे पारंपरिक एमएसएमई क्लस्टरों को नई ऊर्जा मिलेगी और ग्रामीण व अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी।
माननीय मंत्री ने बताया कि टेक्निकल टेक्सटाइल सेक्टर के विकास को केंद्र में रखते हुए मेगा टेक्सटाइल पार्क्स विकसित किए जाएंगे तथा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल प्रोग्राम की भी घोषणा की गई है। ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “महात्मा गांधी ग्राम स्वराज” कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे खादी एवं हस्तकरघा क्षेत्र को और अधिक बल मिलेगा। उन्होंने TReDS (Trade Receivables Discounting System) से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाओं की जानकारी देते हुए कहा कि एमएसएमई इकाइयों को अब तक इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से ₹7 लाख करोड़ से अधिक का क्रेडिट उपलब्ध कराया जा चुका है। एमएसएमई से खरीद के लिए पीएसयू को TReDS प्लेटफॉर्म का अनिवार्य उपयोग करने की व्यवस्था की जाएगी। इनवॉइस डिस्काउंटिंग को क्रेडिट गारंटी से आच्छादित किया जाएगा तथा एमएसएमई इकाइयों के त्वरित वित्त पोषण हेतु GeM को TReDS से एकीकृत किया जाएगा।
माननीय मंत्री ने आगे बताया कि टियर–II एवं टियर–III शहरों में एमएसएमई इकाइयों को विभिन्न रेगुलेटरी कम्प्लायंसेज़ के अनुपालन में सहायता प्रदान करने हेतु “कॉर्पोरेट मित्र” तैनात किए जाएंगे। इसके लिए ICAI, ICSI, ICMAI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा, जिससे उद्यमियों को अनुपालन प्रक्रिया में सरलता मिलेगी और वे अपने व्यवसाय विस्तार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ये पहलें एमएसएमई क्षेत्र को वित्तीय, तकनीकी एवं संस्थागत रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति देंगी तथा रोजगार सृजन व औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।













