ऑपरेशन कायाकल्प के 19 पैरामीटर, प्रोजेक्ट अलंकार और आवासीय विद्यालयों का होगा स्थलीय सत्यापन
अपूर्ण व मानकविहीन कार्यों पर होगी कार्रवाई, पात्र व्यक्ति को योजनाओं के लाभ से वंचित न रखने के निर्देश
जालौन। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से संचालित विकास परियोजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की गहन समीक्षा करते हुए सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों की गुणवत्ता, उपयोगिता और समयबद्धता में किसी भी स्तर पर बर्दास्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक योजना का लाभ धरातल पर दिखाई देना चाहिए और जहां भी कमी मिले, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।जिलाधिकारी ने ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में कराए गए तथा वर्तमान में चल रहे कार्यों का विद्यालयवार स्थलीय सत्यापन कराने के निर्देश दिए। टायलीकरण, बालक-बालिका शौचालय, विद्युत व्यवस्था, भवन मरम्मत सहित निर्धारित 19 पैरामीटर के सभी कार्यों में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, कार्य की मात्रा तथा तकनीकी मानकों की जांच कराई जाएगी। अपूर्ण एवं प्रचलित कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालयों में कराए जा रहे कार्य केवल कागजों पर पूर्ण न दिखें, बल्कि उनका लाभ विद्यार्थियों को वास्तविक रूप से मिलना चाहिए। इसके अनुश्रवण एवं गुणवत्ता परीक्षण के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया।प्रोजेक्ट अलंकार के तहत विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था, शौचालय, मल्टीपरपज हॉल, प्रयोगशाला, साइकिल स्टैंड, पुस्तकालय भवन सहित अन्य अवस्थापना कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कराने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य स्वीकृत आगणन, तकनीकी विशिष्टताओं और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही हों तथा विद्यालयों में अनुमोदित सुविधाएं वास्तविक रूप से क्रियाशील मिलें। गुणवत्ताविहीन अथवा मानकविरुद्ध कार्य मिलने पर संबंधित कार्यदायी संस्था एवं अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। निपुण भारत मिशन की समीक्षा में जिलाधिकारी ने कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के अधिगम स्तर को और बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विद्यालयों में नियमित शिक्षण, अभ्यास, पुनरावृत्ति एवं सतत आकलन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। निपुण आकलन में कमजोर पाए जाने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष अभ्यास एवं उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था कर उनकी सीखने की क्षमता में सुधार लाने को कहा। साथ ही विद्यालयों में शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित कर विद्यार्थियों को अध्ययन के प्रति प्रेरित करने तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों का अभिभावकों एवं जनसामान्य के बीच प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों, आश्रम पद्धति विद्यालय बबीना, जवाहर नवोदय विद्यालय, डायट पिण्डारी एवं समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों सहित सभी आवासीय शिक्षण संस्थानों में भवनों एवं आधारभूत सुविधाओं का तकनीकी सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए। संयुक्त तकनीकी टीम द्वारा भवन की संरचनात्मक स्थिति, छत एवं दीवारों, विद्युत वायरिंग, पेयजल, शौचालय, जल निकासी, अग्नि सुरक्षा तथा छात्रावास की अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। किसी भवन में सुरक्षा संबंधी गंभीर कमी अथवा जोखिम मिलने पर तत्काल सुरक्षात्मक उपाय करते हुए निर्धारित समयसीमा में उसका निराकरण कराया जाए। उपजिलाधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं खंड विकास अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के विद्यालयों का निरीक्षण कर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जहां कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है अथवा कार्य अधूरा है, वहां उपलब्ध संसाधनों से प्राथमिकता पर कार्य कराया जाए। आवश्यकता पड़ने पर CSR एवं अन्य स्थानीय संसाधनों का भी उपयोग किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को किसी भी दशा में आवश्यक मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। दिव्यांगजन, पिछड़ा वर्ग एवं अन्य पात्र वंचित व्यक्तियों को केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विभागवार पात्र व्यक्तियों का चिन्हांकन एवं सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि छूटे हुए पात्र व्यक्तियों के आवेदन एवं पंजीकरण की प्रक्रिया प्राथमिकता से पूरी कर उन्हें अनुमन्य लाभ उपलब्ध कराया जाए। इस कार्य के प्रभावी अनुश्रवण के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया गया। वर्षा ऋतु में क्षतिग्रस्त एवं गड्ढायुक्त हुई सड़कों पर जिलाधिकारी ने विशेष गंभीरता दिखाई। लोक निर्माण विभाग, मंडी समिति, वन विभाग, बेतवा नहर प्रखंड सहित अन्य विभागों के अधीन आने वाली सड़कों का तत्काल चिन्हांकन एवं स्थलीय निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि विद्यालय, अस्पताल, बाजार, ग्राम और तहसील मुख्यालयों को जोड़ने वाली सड़कों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर आवागमन योग्य बनाया जाए। वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त सड़कों का तकनीकी सर्वेक्षण कर पुनर्निर्माण एवं विशेष मरम्मत के प्रस्ताव तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने खराब एवं क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों, जर्जर विद्युत लाइनों तथा झुके अथवा क्षतिग्रस्त विद्युत पोलों का अभियान चलाकर चिन्हांकन कराने को कहा। विद्यालयों, बाजारों, आबादी क्षेत्रों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विद्युत सुरक्षा से जुड़ी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के निर्देश दिए गए। खराब ट्रांसफार्मर बदलने, जर्जर लाइनों को दुरुस्त करने तथा क्षतिग्रस्त पोलों को ठीक कराने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने को कहा गया। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में सुचारु पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए खराब हैंडपंपों का तत्काल चिन्हांकन एवं मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति/हर घर जल योजनाओं में जहां पेयजल आपूर्ति बाधित है, वहां तत्काल समस्या दूर कराने को कहा गया। नलकूपों के विद्युत कनेक्शन, खराब मोटर, पाइपलाइन एवं पंपिंग व्यवस्था की कमियों को प्राथमिकता से दूर करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि पेयजल योजनाओं की सफलता कागजों में पूर्णता से नहीं, बल्कि आमजन को नियमित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने से तय होगी।जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को व्यक्तिगत रुचि लेकर नियमित स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कार्य की गुणवत्ता, मात्रा, उपयोगिता, भौतिक प्रगति तथा निर्धारित मानकों के अनुपालन की बारीकी से जांच की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अनियमितता, गुणवत्ताविहीन निर्माण, कार्य में अनावश्यक देरी अथवा शासकीय धन के दुरुपयोग की स्थिति पाए जाने पर संबंधित अधिकारी अथवा कार्यदायी संस्था का उत्तरदायित्व निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित निगरानी करते हुए कार्यवार प्रगति एवं निरीक्षण आख्या उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी स्तर पर शिथिलता अथवा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।














