कानपुर देहात। जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी अखिलेश अग्निहोत्री ने बताया कि प्रदेश में माटीकला शिल्पकारों द्वारा सदियों से मिट्टी से निर्मित मूर्तियां, खिलौने, बर्तन, नरिया, थपुआ एवं अन्य उपयोगी व कलात्मक वस्तुओं का निर्माण किया जाता रहा है। वर्तमान समय में प्लास्टिक उत्पादों के बढ़ते उपयोग के कारण मिट्टी से निर्मित वस्तुओं की मांग में कमी आई है, जिससे परम्परागत कारीगरों के समक्ष आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गई है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा माटीकला शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से उ०प्र० माटीकला बोर्ड द्वारा ‘माटीकला टूल-किट्स वितरण योजना’ संचालित की जा रही है। योजनान्तर्गत जनपद को प्राप्त 90 लाभार्थियों के लक्ष्य के अनुसार माटीकला की विद्या में प्रशिक्षित एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त शिक्षित बेरोज़गार परम्परागत कारीगरों को निःशुल्क विद्युत चालित कुम्हारी चाक वितरित किया जाएगा।
योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन जिला स्तर पर गठित चयन समिति द्वारा किया जाएगा। इच्छुक अभ्यर्थी उ०प्र० माटीकला बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के उपरांत पंजीकृत आवेदन-पत्र की प्रति दिनांक 15 अगस्त 2026 तक किसी भी कार्यदिवस में कार्यालय जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, चिटिकपुर, रनियाँ, कानपुर देहात में जमा कर सकते हैं।
पात्रता की शर्तें: आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो। आवेदक की आयु 18 से 55 वर्ष के मध्य हो।
आवेदक परम्परागत कारीगर परिवार का बेरोज़गार सदस्य हो। आवेदक माटीकला की किसी विधा में प्रशिक्षित अथवा प्रमाण-पत्र प्राप्त हो।
स्वरोज़गार में रुचि रखने वाली अथवा परम्परागत कारीगर परिवार की महिलाएं भी आवेदन हेतु पात्र होंगी।लाभार्थी का चयन आर्थिक स्थिति, माटीकला अनुभव, तकनीकी ज्ञान एवं विपणन योग्यता के आधार पर किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक अभ्यर्थी कार्यालय जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, कानपुर देहात से संपर्क कर सकते हैं।














