कानपुर देहात सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी अनुपालन के उद्देश्य से माँ मुक्तेश्वरी देवी सभागार कक्ष में जिलाधिकारी कपिल सिंह की अध्यक्षता में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन क्षेत्रीय कार्यालय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कानपुर देहात के तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला में मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) दिग्विजय सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला पंचायत राज अधिकारी, समस्त अधिशासी अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी एवं अन्य स्टेकहोल्डर्स उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि नियमों के अनुसार अब ठोस अपशिष्ट का स्रोत स्तर पर ही चार श्रेणियों में पृथक्करण किया जाना अनिवार्य होगा। इसमें गीला कूड़ा (फल एवं सब्जियों के छिलके तथा अन्य जैविक अपशिष्ट), सूखा कूड़ा (पेपर, प्लास्टिक एवं अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री), सेनेटरी वेस्ट (डायपर, सैनिटरी पैड आदि) तथा स्पेशल केयर वेस्ट (बल्ब, ट्यूबलाइट, एक्सपायरी दवाएं एवं अन्य विशेष अपशिष्ट) शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी के अपशिष्ट का निस्तारण निर्धारित मानकों एवं प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाएगा। कार्यशाला में बल्क वेस्ट जनरेटर (Bulk Waste Generator) की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि ऐसे भवन या संस्थान, जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर अथवा उससे अधिक हो, अथवा जहां प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक जल की खपत होती हो, अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता हो, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में सामुदायिक भवन, विवाह एवं भोज स्थल, विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय तथा अन्य बड़े शैक्षणिक एवं संस्थागत परिसर सम्मिलित हैं। बैठक में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में ऐसे बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान एवं सूचीकरण की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकायों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग को सौंपी गई है। साथ ही, ठोस अपशिष्ट के स्रोत से लेकर अंतिम निस्तारण स्थल तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया का अनुश्रवण एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट की विभिन्न श्रेणियों, उनके संग्रहण, परिवहन एवं प्रसंस्करण की प्रक्रिया, जन जागरूकता, केंद्रीकृत पोर्टल की कार्यप्रणाली, दंडात्मक प्रावधानों एवं जुर्माना निर्धारण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि नियमों के संबंध में जन-जागरूकता बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाए। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने समस्त संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की अध्यक्षता व अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की सह अध्यक्षता में गठित विशेष सेल के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा नियमित अंतराल पर इसकी समीक्षा एवं अनुश्रवण किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल जनपद के निर्माण में सभी विभागों की सक्रिय सहभागिता एवं समन्वित प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। कार्यशाला का समापन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्वच्छ, स्वस्थ एवं हरित कानपुर देहात के निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।













