जिले के 867 पशुपालक आए आगे, निराश्रित गोवंश की कर रहे सेवा
प्रति गोवंश 1500 रुपये हर माह दे रही है सरकार, एक गोपालक को 4 गोवंश तक रखने की अनुमति
कानपुर देहात। निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित स्थान देने के लिए प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ कानपुर देहात में वरदान साबित हो रही है। इस योजना के जरिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 1,042 निराश्रित गोवंशों को पशुपालकों के सुपुर्द कर उन्हें संरक्षित किया गया है। योजना के तहत सरकार पशुपालकों को प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेज रही है।
कानपुर देहात में योजना का लाभ उठाते हुए 867 पशुपालकों ने आगे बढ़कर इन निराश्रित पशुओं को अपनाया है। नियमों के मुताबिक, एक लाभार्थी अधिकतम 4 गोवंश अपने पास रख सकता है। इससे न केवल सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को छत मिली है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
लाभार्थियों को मिल रहा सेवा का अवसर
योजना का लाभ जिले के सुदूर गांवों तक पहुँच रहा है। पुखरायां (देहात) के निवासी प्रताप सिंह ने बताया, “सरकार की इस योजना से हमें बेसहारा पशुओं की सेवा करने का मौका मिला है। समय पर पैसा मिलने से इनके चारे-पानी की व्यवस्था आसानी से हो जाती है।”
वहीं, नंदपुर गांव के लाभार्थी गोरे लाल का कहना है, “यह योजना हम जैसे छोटे पशुपालकों के लिए बहुत मददगार है। इससे न केवल गोवंश का संरक्षण हो रहा है, बल्कि हमें आर्थिक सहारा भी मिल रहा है।”
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुबोध बरनवाल ने बताया कि जिले में योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत 1,042 गोवंश को 867 लाभार्थियों के सुपुर्द किया गया है। हम लगातार पशुपालकों के संपर्क में रहते हैं ताकि गोवंश के स्वास्थ्य और उनके भरण-पोषण में कोई कमी न आए। यह योजना निराश्रित पशुओं के प्रबंधन के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित हो रही है।”











