कालपी (जालौन)! कालपी कोतवाली में तैनात सब इंस्पेक्टर विशाल भड़ाना पर अपने हमराही सिपाही के साथ मिलकर बजरिया क्षेत्र में गरीब सब्जी विक्रेताओं पर लाठीचार्ज किए जाने का गंभीर आरोप लगाए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों और प्रभावित ठेला-फेरी वालों ने इस घटना को लेकर गहरी नाराज़गी जताते हुए जनपद जालौन के लोकप्रिय पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि पुलिस विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और पूरी घटना स्थानीय लोगों के आरोपों पर आधारित बताई जा रही है।
घटना के आरोपों का ब्यौरा
स्थानीय विक्रेताओं के अनुसार, घटना उस समय हुई जब रोज़ की तरह बजरिया में ठेले और फड़ लगाकर सब्जी बेचने का काम चल रहा था। इसी दौरान क्षेत्रीय पुलिस टीम, जिसमें सब इंस्पेक्टर विशाल भड़ाना और उनके हमराही सिपाही शामिल बताए जा रहे हैं, बाजार में पहुंची। आरोप है कि पुलिस ने दुकानदारों को हटाने और व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अचानक सख्त रवैया अपनाया और कथित तौर पर लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई की, जिससे कई छोटे विक्रेता डरकर इधर-उधर भागने लगे।
कुछ लोगों ने दावा किया कि अव्यवस्था हटाने के बजाय यह कार्रवाई गरीबों पर अत्याचार के रूप में दिखाई दी। कई सब्जी बिक्रेताओं ने बताया कि उनके ठेले उलट गए, सामान बिखर गया और उन्हें आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा। एक महिला फेरी वाले ने शिकायत की कि “हम रोज़ दो-चार सौ रुपये कमाकर अपने बच्चों का पेट पालते हैं। हमसे अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?”
पीड़ितों ने लगाई न्याय की गुहार
घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा। कई विक्रेताओं ने मिलकर इस पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि एक ओर सरकार गरीबों और रोज़ कमाने-खाने वालों के लिए योजनाएं चलाती है, वहीं दूसरी ओर अगर जमीनी स्तर पर पुलिस ऐसी कार्रवाइयां करती है तो यह आम जनता के साथ अन्याय है।
विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि बाजार में भीड़ नियंत्रित करने के कई तरीके हो सकते थे, लेकिन बिना चेतावनी दिए लाठी चलाना किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि उनकी रोज़ी-रोटी ही उनकी पूँजी है और उसे नुकसान पहुंचाना सबसे बड़ा नुकसान है।
एसपी दुर्गेश कुमार से निष्पक्ष जांच की अपील
जनपद जालौन के लोकप्रिय और निष्पक्ष छवि वाले पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार तक यह शिकायत पहुंचाई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एसपी की कार्यशैली पारदर्शी और जन-समस्याओं के प्रति संवेदनशील मानी जाती है, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि वे इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में गरीब और फुटपाथ विक्रेताओं के साथ इस तरह की घटना दोबारा न हो।
बजरिया में कथित लाठीचार्ज की यह घटना एक बार फिर पुलिस-जनता संबंधों में संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता की ओर संकेत करती है। गरीब सब्जी विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित होना गंभीर मुद्दा है।










