कालपी (जालौन) धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी के रूप में विख्यात कालपी में बंदरों, कुत्तों एवं आवारा जानवर के विचरण तथा नागरिकों को काटने की घटनाओं से जनता का जीना दूभर हो गया है। सरकारी चिकित्सालय में 7 महीने के अंदर जानवरों के काटने से पीड़ित लोगों के 1966 एंटी रेबीज के इंजेक्शन लग चुके हैं। यह तो सरकारी आंकड़ा है अगर सर्वे कर दिया जाए तो यह संख्या दुगनी हो जाएगी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालपी के सूत्रों के मुताबिक 1 अप्रैल से 31 अक्टूबर तक जो आंकड़े उपलब्ध हुए हैं उनके मुताबिक आवारा कुत्तों के काटने से 527 प्रभावितों को इंजेक्शन लगाए गए हैं। जबकि पालतू कुत्तों के काटने से 387 इंजेक्शन तथा बंदरों के काटने से पीड़ित लोगों को 593 इंजेक्शन चिकित्सालय में लगाए जा चुके हैं।
नगर की सड़कों, गलियों, घरों की छत का आलम यह है कि जगह-जगह कुत्तों तथा बंदरों के झुंड विचरण करते हुए दिखाई देते हैं। सार्वजनिक स्थानों में नागरिकों का पैदल चलना किसी मुसीबत से काम नहीं है। रास्ते में चलती महिलाओं तथा बच्चों को निशाना बनाकर काटने की घटना को कुत्ते तथा बंदर अंजाम देने में नहीं हिचकते है। बंदरों के हमलों से कई लोगों को छत से गिरने या दीवाल से गिरने से मौत भी हो चुकी है।











