कानपुर देहात
जिलाधिकारी कपिल सिंह की अध्यक्षता में आज माँ मुक्तेश्वरी देवी सभागार कक्ष में पराली जलाने की रोकथाम एवं “पराली दो–खाद लो” अभियान को जनपद में प्रभावी रूप से लागू करने हेतु जिला स्तरीय समिति की अत्यंत महत्वपूर्ण एवं निर्णायक बैठक आयोजित की गई जिसमें अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार मौर्य, अपर पुलिस अधीक्षक राजेश पाण्डेय, उपायुक्त एन0आर0एल0एम0, उपायुक्त मनरेगा, उप निदेशक कृषि सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने बैठक की शुरुआत बेहद सख्त अंदाज में करते हुए कहा कि पराली जलाने की एक भी घटना अब जनपद में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह स्पष्ट निर्देश सभी अधिकारियों को दे दिया गया है कि पराली जलाने वाले किसान के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी पर भी समान रूप से कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के लिए शुरू किया गया जनपद का प्रमुख मॉडल “पराली दो–खाद लो” मूल रूप से पराली प्रबंधन का सबसे प्रभावी विकल्प है, जिसके माध्यम से किसान पराली देकर बदले में खाद प्राप्त कर सकते हैं, इससे खेतों की उर्वरता बढ़ती है और पराली जलाने की आवश्यकता समाप्त होती है। जिलाधिकारी ने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम में तीन दिनों के भीतर किसान चौपाल आयोजित कर किसानों को पराली न जलाने के दंड, पर्यावरणीय हानि, स्वास्थ्य प्रभावों तथा खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया की गहन जानकारी दी जाए। जिलाधिकारी ने बैठक में उपलब्ध कराए गए अद्यतन आंकड़ों का विस्तार से विश्लेषण करते हुए बताया कि जनपद में कुल 219 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई हैं जिनमें 161 घटनाएं ड्यूक/मॉनिटरिंग से, 19 घटनाएं बिना दृश्य प्रमाण के तथा 39 मामलों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई है और कुल ₹1,95,000 अर्थदंड वसूला जा चुका है। जिलाधिकारी ने इन आंकड़ों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि जिन विकासखंडों में निरंतर घटनाएं सामने आ रही हैं उनमें विशेष नज़र बनाएं रखें व पराली जलाने की घटनाओं को रोकें। उन्होंने स्पष्ट किया की जिस दिन क्षेत्रों में पराली जलाने की घटना अब प्रकाश में आएंगी अन क्षेत्रों के पर्यवेक्षणी अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही की जायेगी। जिलाधिकारी ने उन ग्राम पंचायतों की सूची भी प्रस्तुत की जिनमें एक से अधिक पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई हैं—दौलतपुर, कड़ोखरा, टीलका नगर, दैथुआ, जीतनगर, गंगापुर, एमआईएस किवाड़ा, जागेश्वर, राधानगर, जौहरपुर, सिलसिलापुर, शीतलपुर आदि—और निर्देश दिया कि इन ग्रामों को रेड मार्क कर विशेष निगरानी में रखा जाए तथा “पराली दो–खाद लो” अभियान में इनकी 100% सहभागिता सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी ने कृषि विभाग, पंचायत राज विभाग, एन0आर0एल0एम और मनरेगा को संयुक्त रूप से आदेश दिए कि “पराली दो–खाद लो” अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा ग्राम सभा, किसान चौपाल, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से निरंतर प्रचार सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि पराली जलाने पर जनपद “जीरो टॉलरेंस” नीति पर कार्य करेगा और किसी भी स्तर की लापरवाही को क्षम्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने आदेश दिया कि सभी अधिकारी प्रतिदिन निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करें, दोषी किसान और लापरवाह अधिकारी पर तत्काल कार्रवाई करें और “पराली दो–खाद लो” कार्यक्रम को जनपद की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं। अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा और किसानों के भविष्य का प्रश्न है, अतः प्रत्येक विभाग पूर्ण कठोरता और जिम्मेदारी के साथ इस अभियान को सफल बनाए। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने फार्मर रजिस्ट्री के संबंध में कहा कि क्षेत्र में फार्मर रजिस्ट्री के पंजीकरण पर भी अधिकारी विशेष ध्यान दें तथा ओ0टी0पी0 प्राप्ति में यदि कोई परेशानी आती है तो सी0एस0सी0 के माध्यम से पंजीकरण कराएं व फार्मर रजिस्ट्री कार्य में तेजी लाएं। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमित कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक राजेश पाण्डेय, समस्त उप जिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी, उप कृषि निदेशक हरीशंकर भार्गव सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।











