कालपी (जालौन)। बच्चों के भविष्य को संवारने के नाम पर बना छात्रावास अब सवालों के घेरे में है। जो इमारत कभी गरीब और जरूरतमंद छात्रों के लिए आशा का केंद्र थी, वहीं आज कथित तौर पर कारोबार का अड्डा बनती दिख रही है। दानदाताओं की भावना को ठेस पहुंचाने वाला यह मामला अब स्थानीय स्तर पर गुस्से की आग बन चुका है।
सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, छात्रावास के लिए बने कमरों को तोड़कर वहां शटर लगवा दिए गए हैं और उनका उपयोग गोदाम के रूप में किया जा रहा है। आरोप है कि समिति से जुड़े एक जिम्मेदार पदाधिकारी की मिलीभगत से यह पूरा खेल हुआ, जिसमें शिक्षा के नाम पर मिली जमीन और भवन का उपयोग निजी फायदे के लिए किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जगह पर बच्चों के सपने बसने थे, वहां अब माल का स्टॉक क्यों रखा जा रहा है? क्या दानदाताओं की मेहनत की कमाई का यही इस्तेमाल होना था? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सीधा-सीधा विश्वासघात है।
इलाके में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़ा आंदोलन बन सकता है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या इस कथित घोटाले पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा?








